ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी धन की हेराफेरी का बताया मास्टरमाइंडशेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये डायवर्ट करने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सरकारी धन की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। ईडी की 10 दिन की कस्टडी पूरी होने के बाद शुक्रवार को उसे पंचकूला अदालत में पेश किया गया।
ईडी ने अदालत में दलील दी कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है और बाहर रहने पर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। अदालत ने दलील स्वीकार करते हुए न्यायिक हिरासत का आदेश जारी कर दिया।
जांच में सामने आया कि रिभव ऋषि ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ड्राइवरों, कर्मचारियों और रिश्तेदारों के नाम पर कैपको फिनटेक सर्विसेज और एसआरआर प्लानिंग गुरुस जैसी शेल कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के खातों में हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के करोड़ों रुपये डायवर्ट किए गए। ईडी के अनुसार आरोपी और उसके परिवार ने इस घोटाले से करीब 34.22 करोड़ रुपये हासिल किए।
ईडी ने आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी धन को पहले ज्वैलर्स और अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे नकदी में बदलकर ट्राईसिटी क्षेत्र में बांटा गया।
जांच में नगर निगम चंडीगढ़ में करीब 116.84 करोड़ रुपये की फर्जी एफडी का मामला सामने आया है। वहीं हरियाणा के डायरेक्टर पंचायत विभाग के खातों से करीब 46.56 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। इसके अलावा चंडीगढ़ की संस्था सीआरइएसटी के खातों से भी बिना अनुमति लाखों रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है।