पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। लद्दाख इलाके में 1967 के बाद यह पहला ऐसा मौका है, जब सैनिकों ने जान गंवाई है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने इस झड़प को दोनों देशों के बीच गंभीर घटना करार दिया है।
जनरल (सेवानिवृत्त) मलिक ने कहा कि इस घटना ने उन्हें सितंबर 1967 की नाथुला दर्रे की घटना की याद दिला दी। उन्हें उस समय वहां भेजा गया था। सितंबर 1967 को नाथूला में भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव हुआ था। जानकारी के अनुसार 1967 में टकराव की वजह चीन का भारतीय सीमा में गड्ढा खोदना था।
भारतीय जवानों ने चीनी सैनिक से ऐसा न करने के लिए कहा था। इस दौरान हुए हिंसक संघर्ष में दोनों पक्षों के कुछ सैनिकों को जान गंवानी पड़ी थी। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि वह झड़प में जान गंवाने वाले भारतीय सैनिकों को नमन करते हैं और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच गतिरोध के समाधान के लिए कूटनीति और सैन्य स्तर पर बातचीत का दौर जारी है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ग्राउंड लेवल पर तनाव व्याप्त है। दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के आमने सामने हैं। यदि गुस्सा दूसरी तरह है तो हमारे सैनिक भी गुस्से से भरे हुए हैं।
चीन नहीं चाहता है कि भारत घाटी के आसपास निर्माण कार्य करे। इस तरह की घटना गलवान वैली में पहले कभी नहीं देखी गई थी। दोनों देशों के बीच असहमति ने इस घटना का रूप ले लिया।