पंजाब में करीब 38 प्रतिशत एससी-एसटी आबादी है। विभिन्न विवादों के चलते इन लोगों की शिकायतें पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पास पहुंचती हैं। नियमानुसार हर तीन माह में होने वाले आयोग की नियमित बैठकें न होने की वजह से लंबित केसों की संख्या बढ़ती जा रही है।
पंजाब में अनुसूचित जाति के लोगों की वर्षों से लंबित पड़ी शिकायतों को जल्द निपटाने के लिए आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। इन केसों के शीघ्र निपटान के लिए अब एससी आयोग की अदालत तैयार होगी। पंजाब सिविल सचिवालय की चौथी मंजिल पर इसे तैयार किया जाएगा जहां जहां वर्चुअल सुनवाइयां भी होंगी। जनवरी तक यह नई अदालत वजूद में आ जाएगी।
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पंजाब में करीब 38 प्रतिशत एससी-एसटी आबादी है। विभिन्न विवादों के चलते इन लोगों की शिकायतें पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पास पहुंचती हैं। नियमानुसार हर तीन माह में होने वाले आयोग की नियमित बैठकें न होने की वजह से लंबित केसों की संख्या बढ़ती जा रही है। करीब 8700 पेंडिंग शिकायतों में से 3000 केस ही निपटे हैं जबकि लगभग 5700 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं।
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने बताया कि वर्चुअल कोर्ट रूम बनने के बाद लोगों के पैसे और समय की काफी बचत हो सकेगी। इसके अलावा हर जिले में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के निपटारे के लिए एसपी स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जबकि डीआईजी नवीन सैनी व एआईजी सुरिंदरजीत कौर को राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। विशेष डीजीपी नरेश अरोड़ा, चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी के साथ मिलकर आयोग और पुलिस विभाग के तालमेल को और मजबूत करेंगे।