किसानों के ट्रैक्टरों पर झांकी के लिए लगाए गए बैनर।
- फोटो : h
चंडीगढ़। दिल्ली की सीमाओं पर दो महीने से आंदोलन कर रहे किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के जरिए सिर्फ तीन खेती कानूनों का ही विरोध नहीं जताएंगे बल्कि किसानों ने परेड में शामिल किए अपने ट्रैक्टरों पर देश की कानून-व्यवस्था, महिलाओं व दलितों पर अत्याचार, गरीब वर्ग के प्रति शासकीय उदासीनता, जातिगत भेदभाव, पूंजीवादी व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों को भी झांकी के रूप में तैयार किया है।
जानकारी के अनुसार 26 जनवरी को पंजाब से 2 लाख से भी अधिक ट्रैक्टर, हरियाणा से भी करीब 2 लाख ट्रैक्टरों के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए हजारों की संख्या में ट्रैक्टरों के साथ किसान दिल्ली की सड़कों पर परेड करेंगे। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से जारी बयान के अनुसार ट्रैक्टर परेड के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सोमवार रात भर अन्य राज्यों से ट्रैक्टर-ट्रालियों के दिल्ली सीमा पर पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। संगठन की ओर से अनुमान लगाया गया है कि ट्रैक्टर परेड में पांच लाख से ज्यादा ट्रैक्टर उतर सकते हैं। परेड में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ से भी किसान दिल्ली पहुंच गए हैं।
सोमवार दिन में दिल्ली सीमा पर पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों से पहुंचे ट्रैक्टर-ट्रालियों पर झांकियां सजाने का काम जारी रहा। किसान अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज और किसान संगठन के झंडे लगाने के साथ-साथ खेती कानूनों के खिलाफ बड़े बैनर लगाते दिखाई दिए। इन बैनरों के साथ ही अनेक ट्रालियों पर देश में महिलाओं और दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं को सचित्र दर्शाते हुए इन पर रोक लगाने के स्लोगन भी लिखे गए हैं। इनके अलावा भारत सरकार के फैसले के चलते कॉरपोरेट घरानों द्वारा की जा रही लूट को भी बैनरों के जरिए दर्शाया गया है।
ट्रैक्टर सजाने की होड़ में स्थानीय दुकानदारों के वारे-न्यारे
चंडीगढ़। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के लिए दिल्ली की सीमा पर पहुंच रहे किसानों में अपने-अपने ट्रैक्टरों को सजाने की होड़ लगी रही। सोमवार को राजधानी की सीमाओं पर जहां किसान दो महीने से धरना दे रहे हैं, के आसपास वाहनों की असेसरीज बेचने वाली दुकानों पर जमकर खरीददारी हुई। जानकारी के अनुसार युवा किसानों में अपने ट्रैक्टरों के लिए सजावटी सामान खरीदने को लेकर उत्साह ने दुकानदारों के वारे-न्यारे कर दिए हैं। ज्यादातर किसान अपने ट्रैक्टरों पर ऊंची आवाज वाले म्युजिक सिस्टम लगवाते दिखाई दिए, वहीं ट्रैक्टरों को सजाने के लिए अन्य असेसरीज की जोरदार खरीद के चलते स्थानीय दुकानों में सामान की किल्लत हो गई। दुकानदारों का कहना था कि किसानों के बीच सबसे ज्यादा मांग पावर स्पीकरों की है। हालांकि किसान बड़ी संख्या में स्टीरियो और अन्य सजावटी सामान भी खरीद रहे हैं। खरीदारी की इस तेजी के चलते दुकानदारों ने अतिरिक्त स्टाक के ऑर्डर भी दे दिए और दिल्ली के भीतर के बाजारों से अतिरिक्त माल मंगाकर किसानों को सामान उपलब्ध कराया।