चंडीगढ़। किसान-मजदूर मोर्चा ने एलान किया है कि मांगों के समर्थन में 18 और 19 दिसंबर को पंजाब के सभी जिलों में किसान डीसी कार्यालयों के बाहर धरना देंगे। यह प्रदर्शन पूरा दिन चलेगा। इसके बाद भी सरकार यदि उनकी मांगों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुई तो 20 दिसंबर को रेल रोको आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा। इस दौरान संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर व अमृतसर किसानों द्वारा रेलगाड़ी रोकी जाएंगी।
आंदोलन की इस रणनीति का खुलासा शुक्रवार को किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं ने किसान भवन में किया। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर और जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि अपनी मांगों के समर्थन में किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं मगर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। इन मांगाें में मुख्यत: खनौरी व शंभू बॉर्डर पर धरना उठाते समय पुलिस द्वारा किए किसानों के नुकसान की भरपाई, पुलिस द्वारा दर्ज किए केसाें को वापस लेना, सीड एक्ट व बिजली संशोधन बिल-2025 को लागू न करना, शहीद हुए किसानों को मुआवजा व नौकरी देना और भारत-अमेरिका समझौते से पीछे हटना इत्यादि शामिल है। किसान नेताओं ने कहा कि जो मसले केंद्र से संबंधित हैं, उसके लिए हम केंद्र से लड़ रहे हैं मगर जो मांगें पंजाब सरकार ने माननी हैं, उस पर तो मुख्यमंत्री ध्यान दें। किसानों की मांगों की अनदेखी की वजह से ही अब 18 व 20 दिसंबर को आंदोलन की रणनीति तय की गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा से सुलह को तैयार केएमएम
पिछले कुछ समय से संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और किसान-मजदूर मोर्चा (केएमएम) के बीच कुछ मसलों पर मतभेद चल रहा है। केएमएम ने इन मतभेदों को दूर करने की पहल की है। केएमएम के नेताओं ने प्रेसवार्ता के दौरान साफ कहा कि वे एसकेएम के साथ चलने को तैयार हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि किसान एकता के बिना सरकार पर दबाव नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी शर्त के आपस में बैठकर मतभेद दूर करना चाहते हैं, लिहाजा एसकेएम के नेताओं को भी आगे आना चाहिए।