चंडीगढ़ में चल रहा सैनिटाइजेशन का काम
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लॉकडाउन व कर्फ्यू के तीन मई को खत्म होने के बाद शहरवासियों को किस तरह से राहत मिल सकती है, इसे लेकर चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से प्लानिंग शुरू हो गई है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच शहर के कर्मचारियों व मजदूरों को आ रही समस्या को देखते हुए पोस्ट-लॉकडाउन प्लान तैयार करने के लिए प्रशासन ने एक हाईलेवल कमेटी का गठन कर दिया है। इसकी अध्यक्षता वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा करेंगे।
शहर के विभिन्न वर्गों की मांगों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के सभी दिशा-निर्देशों के तहत किन मामलों में छूट दी जा सकती है, इस समीक्षा के लिए ही कमेटी का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार कमेटी देखेगी कि अनिवार्य सेवाओं के अतिरिक्त अन्य किन दुकानों को खोला जा सकता है। इनमें से सैलून, बुकशॉप, स्टेशनरी सबसे अहम है। इसके अलावा स्कूल, कालेजों और यूनिवर्सिटी को कब तक बंद रखा जाए और बंद होने के दौरान पढ़ाई और परीक्षाएं कैसे होंगी, इस पर भी कोई फैसला लिया जाएगा।
एक महीने से बंद पड़े शहर के उद्योगों में जान डालने के लिए प्रशासन टैक्स, फीस आदि में रियायत देने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा शहर के छोटे उद्योगों को किन शर्तों पर काम करने की छूट दी जा सकती है, समेत कई विषयों पर कमेटी काम करेगी। कमेटी की ओर से बनाई गई रिपोर्ट पर चर्चा के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर इस पर आखिरी फैसला लेंगे।
कमेटी में शामिल अधिकारी
नगर निगम कमिश्नर केके यादव, डीसी मनदीप सिंह बराड़, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग व एक अन्य अधिकारी को कमेटी में शामिल किया है। इन अधिकारियों को 30 अप्रैल तक रिपोर्ट सौंपनी होगी।
कुछ न कुछ राहत देने के पक्ष में अधिकारी
तीन मई के बाद शहरवासियों को कैसे राहत दी जा सकती है, इस पर अमर उजाला ने सोमवार को प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। अधिकारियों का कहना है कि शहर में कोरोना वायरस के मामले बीते 48 घंटों में काफी बढ़े हैं, लेकिन यह देखने में सामने आया है कि नए मामले शहर के चुनिंदा हिस्सों से ही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि 3 मई के बाद शहरवासियों को कोई न कोई राहत देनी होगी, क्योंकि कर्मचारी और मजदूर काफी परेशान हैं। उनकी रोजी-रोटी के लिए कोई फैसला करना होगा। इसके अलावा अन्य कई मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शहर के अफेक्टेड पॉकेट को चिह्नित कर बाकी शहर से कंटेनमेंट जोन के टैग को हटाने पर भी विचार चल रहा है। जिन हिस्सों में कोरोना के केस ज्यादा हैं, वहां सख्ती बरती जाएगी और अन्य हिस्सों में कुछ रियायत दी जा सकती है।
शहर के लिए आसान नहीं आगे की राह
शहर के लिए 3 मई के बाद की राह भी आसान नहीं दिख रही है। इसके संकेत सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, एडवाइजर मनोज परिदा और डीजीपी संजय बेनीवाल के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मिले। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल थे। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो भी शहर व जिले हॉटस्पॉट व रेड जोन घोषित किए गए हैं, वहां पर गृह मंत्रालय की तरफ से जारी सभी दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए।
साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना की जाए। गौरतलब है कि चंडीगढ़ भी रेड जोन में ही आता है। हालांकि, पीएम ने लॉकडाउन के खत्म होने के बाद के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखते हुए एक प्लान को तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं। पीएम ने कोरोना से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस सिस्टम के बारे में उल्लेख किया, जो चंडीगढ़ में पहले से ही लागू है।
लॉकडाउन के बाद शहरवासियों को कुछ राहत देनी होगी, हालांकि बीते दो दिनों में मामलों की संख्या भी बढ़ी है। इसलिए पूरी स्थिति की समीक्षा के साथ एक प्लान तैयार करने के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में पांच अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। जो यह देखेगी कि कैसे और कौन से स्कूल-कॉलेज, उद्योग, दुकानों आदि को खोला जा सकता है।
- मनोज परिदा, एडवाइजर