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आयोजन : संस्कृत से संस्कृति हमारी, हिंदी से हिंदुस्तान है, हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत पंचकूला कार्यालय में हुआ गोष्ठी का आयोजन

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पंचकूला। ‘बात करें जो लिपि की तो, बात ही इसकी निराली है, जैसा लिखते वैसा बोलें, पुराना नाम इसी का पाली है। गौतम बुद्ध की रचना का भी इसी भाषा में ज्ञान है, संस्कृत से संस्कृति हमारी, हिंदी से हिंदुस्तान है।’
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‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत अमर उजाला के पंचकूला कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में शिक्षिका शिवांगी ने यह बातें अपने अंदाज में कहीं। गोष्ठी में विद्यार्थियों, शिक्षकों व अभिभावकों ने हिस्सा लिया। शिवांगी ने मातृभूमि, मातृभाषा के प्रति प्रेम की सिफारिश करते हुए सहजता से अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी हिंदी सीखने और उसे अपनाने की होड़ है। यह सब तकनीक के जरिए ही संभव हुआ है, तो अपने देश में हिंदी की हालत बदतर क्यों होती जा रही है। पहले जहां बच्चे स्कूलों में प्रार्थना हिंदी में करते थे, अब अंग्रेजी में करते हैं।
वहीं शिक्षक राजीव ने बताया कि हिंदी भाषा ही हमारी पहचान है। जरूरत है इस भाषा को अधिक से अधिक लोगों के ज्ञान से जोड़ने की। इसके लिए स्कूलों को आगे आना चाहिए। सप्ताह में एक दिन ऐसा रखें, जिस दिन सिर्फ हिंदी में बात हो, हिंदी में ही बच्चों की कक्षाएं लगें। तब इसको चलन में लाया जा सकता है। गोष्ठी में स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी ‘तकनीकी युग में हिंदी के विकास की संभावनाओं पर खुलकर बात की।
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चाहती हूं बेटी अच्छी तरह हिंदी सीखे
मुझे बचपन से ही हिंदी बहुत पसंद है, इसलिए अपनी बेटी को गवर्नमेंट मॉडल स्कूल में पढ़ा रही हूं। ज्यादा से ज्यादा कोशिश रहती है कि मेरी बेटी हिंदी विषय पर भी कोर्स में शामिल दूसरे विषयों की तरह फोकस करे और रोजाना खाली समय में हिंदी समाचार पत्र पढ़े। ताकि उसकी हिंदी अच्छी हो और उसे देश विदेश में क्या हो रहा है, उसकी जानकारी मिल सके। -सलोनी, निवासी सेक्टर 11 पंचकूला।
स्कूल में हिंदी अंग्रेजी दोनों को मिले बराबर तवज्जो
स्कूल में ज्यादा समय हिंदी के लिए नहीं मिल पाता, महज 40 मिनट की कक्षा होती है, लेकिन मुझे जब भी मौका मिलता है हिंदी से जुड़ी भाषण प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहती हूं। मेरा मानना है कि हिंदी को हम तभी आगे ले जा सकते हैं, जब स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को बराबर तवज्जो दी जाए। - शिव्या, छात्रा।
घर पर हिंदी में ही करते हैं बातें
हम कान्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। यहां सुबह से शाम तक अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है। हिंदी के ज्ञान को बढ़ाने के लिए हमारे स्कूल में एक क्लब बनाया गया है, जब भी हमें मौका मिलता है, हम हिंदी को करीब से जानने और समझने की कोशिश करते हैं। घर जाने के बाद ज्यादा से ज्यादा हिंदी बोलने की कोशिश करते हैं। ताकि हम मातृभाषा से जुड़े रहें। -मयंक, सवेरा, कुंजन विद्यार्थी।
हिंदी विश्व में सम्मान दिलाती है
हिंदी दुनिया भर में हमें सम्मान दिलाती है। यह भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है, जो हमें विश्व में पहचान दिलाती है। इतना ही नहीं बल्कि ज्यादा बोलने समझने वाली भाषाओं में है। फिर भी इसके लिए हमलोग समय कम दे रहे हैं। स्कूल में तो समय मिलता नहीं, लेकिन घर पर हिंदी के ज्ञान के लिए हिंदी न्यूज पेपर पढ़ती हूं। -अन्नया, छात्रा।
हिंदी के समाचार पत्र रोज पढ़ती हूं
हिंदी को समझने और सीखने के लिए रोजाना हिंदी के समाचार पत्र पढ़ती हूं। यह हमारी मातृभाषा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। मैं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को बराबर तवज्जो देती हूं। जब भी स्कूल में भाषण देने की बात होती है, माध्यम मेरा हिंदी होता है। मेरी कोशिश है कि अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में मैं पारंगत रहूं। नवीशा, छात्रा।
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