चंडीगढ़। हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2021 के लागू होने के 3 महीने बाद भी सेवा नियम नहीं बन पाए हैं। इस नकल विरोधी कानून को सरकार ने 10 सितंबर से लागू किया है। हरियाणा लोक सेवा आयोग के डेंटल सर्जन भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी अनिल नागर व अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर में इस कानून के तहत भी धाराएं लगी हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि कानून की धारा 14 (1 ) में इसके उद्देश्यों को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करने के लिए सरकार ने नियम बनाने का प्रावधान किया है। बिना नियमों के कानून को लागू करने में तकनीकी पेच फंस सकता है। नागर व अन्य के विरुद्ध विजिलेंस ब्यूरो ने एफआईआर में कानून की धारा 8(3 ) (4) जोड़ी हैं। नियमों में ही यह स्पष्ट उल्लेख हो पाएगा है कि कानून को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया क्या होगी। कानून में जोड़ी गई धारा-9 में प्रावधान है कि अगर कोई परीक्षार्थी कानून के अंतर्गत दोषी साबित होता है तो वह दो वर्षों तक किसी भी लोक परीक्षा में नहीं बैठ सकेगा।
हेमंत ने बताया कि इस धारा में यह स्पष्ट नहीं है कि दो वर्षों की अयोग्यता अवधि परीक्षार्थी के परीक्षा में नकल आदि अनुचित साधन का प्रयोग करते पकडे़ जाने से या कोर्ट द्वारा दंड के रूप में दी गई सजा की अवधि पूरी होने से लागू होगी। कानून में यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसके अंतर्गत विभिन्न अपराध संज्ञेय, गैर संज्ञेय, जमानती या गैर जमानती होंगे।