फेस्टिवल सीजन में दुकानदारों को स्टॉल लगाने और वेंडरों को अपना सामान बेचने के लिए नगर निगम से अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में अब मार्केट में अतिक्रमण बढ़ने लगा है। वहीं, इंफोर्समेंट विंग केसामने चुनौती है कि पहले से ही चल रहे अभियान को किस तरह से और तेज कर अतिक्रमण को रोका जाए। हालांकि, अभी इंफोर्समेंट की कार्रवाई नाकाफी है। लोग चालान के बावजूद अतिक्रमण कर ले रहे हैं।
वैसे तो हर साल फेस्टिवल सीजन के लिए नगर निगम से पर्ची कट जाती थी। इस बार पर्ची न कटने से अतिक्रमण बढ़ रहा है। दशहरा नजदीक आते ही मार्केट में खरीदाराें की भी अच्छी खासी संख्या पहुंच रही है। ऐसे में वेंडरों की संख्या तो बढ़ ही गई है, वहीं दुकानदारों ने भी अपना सामान आगे निकाल लिया है। इंफोर्समेंट की टीम को देखकर दुकानदार तत्काल सामान हटा लेते हैं, वहीं टीम के हटते ही अतिक्रमण वहीं का वहीं पहुंच जाता है।
सबसे ज्यादा बुरा हाल सेक्टर 19 की पालिका और सदर मार्केट का है। वहीं, दुकानदार टीम केहटते ही तत्काल अपना सामान बाहर निकाल लेते हैं। पालिका मार्केट में भी लोग कब्जा किए बैठे हैं। ऐसे में इंफोर्समेंट विंग केलिए चुनौती कम होने वाली नहीं, बल्कि बढ़ ही रही है।
हम वेंडर नहीं, हमें तो मिले स्टॉल लगाने की अनुमति
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी संजीव चड्डा का कहना है कि निगम को समझना चाहिए कि स्टॉल लगाने की पुरानी परंपरा है। यह हमेशा ही लगता रहा है। रही बात हाईकोर्ट की तो अवैध वेंडरों को हटाने के लिए कहा गया है, न कि दुकानदारों को स्टॉल लगाने से रोकने के लिए।
हमारे ऊपर शॉप एक्ट लागू होता है, न कि वेंडर एक्ट। फिर भी निगम को इसमें सोचना पड़ रहा है। दुकानदारों ने सामान खरीद लिया है। उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। यदि स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं देनी थी तो पहले बताना चाहिए था।
सोमवार तक अनुमति मिलने की उम्मीद
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और नॉमिनेटेड पार्षद चरनजीव सिंह का कहना है कि उम्मीद है सोमवार को नगर निगम की ओर से अनुमति मिल जाएगी। निगम के अधिकारी भी मार्केट की स्थिति जानते हैं। शहर में व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग है, इसलिए निगम सभी का नुकसान नहीं होने देगा। उम्मीद है कि जल्द स्टॉल लगाने की अनुमति देगा।