एक्सीडेंटल डेथ के बाद लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) को डबल बीमा राशि न देना महंगा पड़ गया। फोरम ने ब्याज के साथ डेढ़ लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 30 दिनों के अंदर इन आदेशों का पालन करना होगा नहीं तो कंपनी को क्लेम और मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा।
मनीमाजरा के शांति नगर निवासी पिंकी ने फोरम में पंचकूला सेक्टर-2 लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया और करनाल एलआईसी ऑफ इंडिया के डिवीजन ऑफिस के सीनियर डिवीजन मैनेजर के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके पति हरीश कुमार ने बीमा कंपनी के पंचकूला ऑफिस से इश्योरेंस पॉलिसी ली थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 11 अक्तूबर 2017 की शाम को हरीश कुमार बाथरूम में स्लिप करने के बाद फ्लोर पर गिर गए, जिससे उन्हें सिर पर कई गंभीर चोटें आईं। इसके बाद वह उन्हें मनीमाजरा के प्राइमरी हेल्थ सेंटर लेकर गईं। हालत में सुधार नहीं होता देख हरीश कुमार को सेक्टर-32 के जीएमसीएच और उसके बाद पीजीआई रेफर किया गया, जहां 26 अक्तूबर 2017 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
उन्होंने कहा कि डेथ के बाद कंपनी को डबल बीमा राशि पे करनी चाहिए थी, जबकि उन्हें सिर्फ साधारण क्लेम राशि एक लाख 74 हजार 948 रुपये ही जारी किए। इसके बाद ही कंपनी पर सेवा में कोताही का आरोप लगाते हुए इस संबंध में फोरम में शिकायत दी गई। दूसरे दोनों पक्षों ने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती।
फोरम ने दिए यह आदेश
फोरम ने अपने आदेशों में कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने अल्कोहल का सेवन किया है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह गिर जाएगा। साथ ही इस केस में ऐसा भी नहीं कि शराब काफी अधिक मात्रा में सेवन की गई थी, जिसके चलते वह बैलेंस खोने के चलते गिर गए। इस तरह ऐसा नहीं माना जा सकता कि अल्कोहलिक व्यक्ति जमीन पर गिर जाएगा और इसे प्रूफ भी नहीं माना जा सकता है।
उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया। फोरम ने कंपनी को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ डेढ़ लाख रुपये देने के निर्देश दिए हैं। मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी शिकायतकर्ता को अदा करना होगा।