चंडीगढ़। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने सेवाएं देने में जरूरत से ज्यादा देरी करने के लिए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। आयोग को निगम अधिकारियों के देरी से सेवाएं देने क शिकायतें मिली थी। सोमवार को निगम के प्रबंध निदेशक आयोग के सामने पेश हुए। आयोग शिकायतों की सुनवाई के दौरान प्रबंध निदेशक के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। असंतोषजनक जवाब मिलने पर दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने के आदेश तुरंत जारी कर दिए गए।
आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने बताया कि यह निर्णय सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सरकारी सेवाओं की निर्धारित समय सीमा में आपूर्ति न होने पर लिया गया है। कार्य में अनियमितता पाए जाने पर शिकायत निवारण प्राधिकरण दोषी अधिकारी पर 250 से 5000 रुपये तक जुर्माना लगा सकता है। इसके अलावा अधिकारी की गलती पाए जाने पर आवेदनकर्ता को एक हजार रुपये का मुआवजा दिलवाने का भी प्रावधान है। अधिनियम अनुसार संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता फिर भी संतुष्ट नहीं है तो सेवा का अधिकार आयोग के पास दोबारा शिकायत कर सकता है। आयोग के मुख्य आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि देरी से सेवाएं देने वाले विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। अधिकारी अपने कार्यालय के बाहर ऐसे स्थानों पर डिस्पले बोर्ड लगवाएं, जहां लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत अधिक होती हो।
उन्होंने कहा, संबंधित सरकारी विभाग व्यक्ति को एक्नॉलेजमेंट स्लिप दें, जिसमें यह जानकारी होनी चाहिए कि अमुक सरकारी सेवा का लाभ कितने दिन में मिल जाएगा। यदि आवेदनकर्ता के आवेदन में कोई कमी रह गई हो तो इसकी जानकारी उसे तुरंत दी जानी चाहिए। अगर निर्धारित समयावधि में वह सेवा व्यक्ति को नहीं मिलती तो 30 दिन के अंदर फर्स्ट रिड्रेसल अथॉरिटी को इसकी शिकायत की जा सकती है। फर्स्ट रिड्रेसल अथॉरिटी से कार्य का निष्पादन नहीं होता तो व्यक्ति 60 दिन के अंदर सेकेंड ग्रीवेंस रिड्रेसल अथॉरिटी को अपनी शिकायत दे सकता है।