अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के लुधियाना से विधायक बने संजीव अरोड़ा के निर्वाचन को चुनाव याचिका के माध्यम से पंजाब-हरियाणा हाईकाेर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में भ्रष्ट आचरण और खर्च छिपाने के आधार पर उनकी जीत को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
जसविंदर सिंह माल्ही ने याचिका में आरोप लगाया है कि अरोड़ा ने विधायक बनने के लिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान अवैध तरीकों और अनुचित व भ्रष्ट आचरण का इस्तेमाल किया। अरोड़ा ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए हलफनामे में जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।
याचिकाकर्ता ने बताया कि अरोड़ा ने चुनाव आयोग के नियमों और दिशानिर्देशों के तहत आवश्यक पूरा विवरण नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों के बाहर मतदाता पर्ची बांटने, रोज 25-30 जनसभाएं आयोजित करने, मीडिया प्रचार और पेड न्यूज पर किए गए खर्च का खुलासा नहीं किया।
याचिका में कहा गया है कि यदि इन सभी खर्चों को जोड़ा जाए, तो कुल खर्च चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो जाएगा। यह भी आरोप लगाया गया है कि अरोड़ा ने अपने अभियान में पेशेवर धार्मिक प्रचारकों को शामिल किया और धर्म के नाम पर वोट मांगे, जो कि भ्रष्ट आचरण है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पंजाब में सत्तारूढ़ दल से संबंध रखने वाले अरोड़ा ने राज्य मशीनरी की मदद से चुनाव जीतने के लिए सभी अनुचित तरीकों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि अरोड़ा की टीम और परिवार ने विभिन्न धार्मिक स्थलों जैसे गुरुद्वारों और हिंदू धार्मिक स्थानों का दौरा किया और गैर-मंजूर फंडों से अनुदान दिए। उन्होंने राज्य के खजाने और नगर निगम लुधियाना से सिविल कार्य भी करवाए।