चंडीगढ़। पंजाब के निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मुफ्त दाखिला देना होगा। इन आदेशों की पालना न करने पर शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जिसका अधिकार जिला शिक्षा अधिकारी को दिया गया है। इस संबंध में पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
इन दिशा-निर्देशों में साफ किया गया है कि नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और पहली कक्षा में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखी जाएं। इन विद्यार्थियों की फीस का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी। हालांकि, परिवहन का खर्च अभिभावकों को उठाना होगा।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद ही विभाग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 21 मार्च विभाग ने सभी निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के निर्देश जारी किए थे। आदेशों के अनुसार 25% आरक्षित सीटों में से 12.5% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, 5% अनुसूचित जाति (एससी), 5% अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 1.25% शहीद सैनिकों के विधवाओं के बच्चों और 1.25% अनाथ बच्चों के लिए आरक्षित होंगी। स्कूलों में दाखिले के लिए प्राथमिकता स्कूल से 1 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को दी जाएगी। इसके बाद 3 और फिर 6 किलोमीटर तक रहने वाले बच्चों को सीटें दी जाएंगी।
हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को आरटीई कानून के तहत 25% दाखिला सुनिश्चित किया जाए। स्कूलों ने शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश न होने का हवाला देकर दाखिला देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार से हलफनामा मांगा था।