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कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला: नगर निगम-बैंक के गठजोड़ पर ईडी का शिकंजा, ट्राइसिटी में 12 ठिकानों पर छापे

Fri, 24 Apr 2026 01:47 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला

सार

ईडी की शुरुआती जांच ने उस नेक्सस को बेनकाब कर दिया है जिसमें बैंक अधिकारी, निगम कर्मचारी और निजी फाइनेंसर शामिल थे। जांच एजेंसी ने कई अहम डिजिटल साक्ष्य, सेल-परचेज एग्रीमेंट और संदिग्ध निवेश के दस्तावेज जब्त किए हैं। 
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पंचकूला नगर निगम - फोटो : संवाद
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विस्तार
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नगर निगम के 145 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फंड गबन मामले में ईडी की बुधवार से वीरवार तक ट्राइसिटी में करीब 48 घंटे कार्रवाई चली। इस दाैरान चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और राजपुरा में हड़कंप का माहाैल रहा। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जद में आए 12 ठिकानों पर एक साथ छापे के दाैरान जांच एजेंसी ने कई अहम डिजिटल साक्ष्य, सेल-परचेज एग्रीमेंट और संदिग्ध निवेश के दस्तावेज जब्त किए हैं। 
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इस मामले में शामिल आरोपी पुष्पेंद्र सिंह, रजत दह्रा, दिलीप कुमार राघव, विकास कौशिक, सनी गर्ग, कपिल कुमार और सनत रियल्टर्स (जीरकपुर) से संबंधित जांच को आगे बढ़ाने के लिए यह कार्रवाई की गई है।

तीन स्तरों पर रचा गया साजिश का ताना-बाना

ईडी की शुरुआती जांच ने उस नेक्सस को बेनकाब कर दिया है जिसमें बैंक अधिकारी, निगम कर्मचारी और निजी फाइनेंसर शामिल थे। आरोप है कि कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पपिंदर सिंह और कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव ने निगम के तत्कालीन सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर इस सुनियोजित घोटाले की पटकथा लिखी। इन्हीं के ठिकानों पुष्पेंद्र सिंह, रजत दह्रा, दिलीप कुमार राघव, विकास कौशिक, सनी गर्ग, कपिल कुमार और सनत रियल्टर्स (जीरकपुर) पर छापे मारे।

मुख्य खुलासे

आरोपियों ने जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर नगर निगम के नाम पर दो फर्जी बैंक खाते खुलवाए।
निगम के असली खातों से करोड़ों रुपये इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किए गए।
पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए फर्जी ईमेल आईडी और नकली फंड माइग्रेशन लेटर का इस्तेमाल हुआ।

16 फर्जी एफडी का खेल  

निगम अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए आरोपियों ने जालसाजी की सारी हदें पार कर दीं। बैंक की सेक्टर-11 शाखा में 145.03 करोड़ रुपये के निवेश के नाम पर 16 फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जारी किए गए। दस्तावेजों में इनकी मैच्योरिटी वैल्यू 158.02 करोड़ रुपये दर्शाई गई, जबकि हकीकत में यह पैसा बैंक से काफी पहले निकाला जा चुका था।

राउंड ट्रिपिंग और रियल एस्टेट में खपाई काली कमाई

ईडी ने पैसे के उस रास्ते (ट्रेल) को भी ट्रैक कर लिया है, जिसके जरिये गबन की गई राशि को सफेद किया गया। जांच के अनुसार, निकाली गई रकम को राजत डहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसरों के जरिए घुमाया गया (राउंड ट्रिपिंग)। अंतत, यह पैसा मुख्य साजिशकर्ता पुष्पपिंदर सिंह और उसकी पत्नी प्रीति ठाकुर के पास पहुंचा। छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जो इशारा करते हैं कि इस राशि का एक बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश किया गया है।

अब आगे क्या

ईडी के अधिकारी अब जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और बैंक लॉकरों की जांच कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार नाम इस जांच की चपेट में आ सकते हैं और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। इस मामले में क्या आपको किसी विशिष्ट अधिकारी की संलिप्तता या बैंक के ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड पर और गहराई से इनपुट चाहिए।
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