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पेयजल संकट : बहु मंजिला और स्टिल्ट प्लस चार भवन तो बनवा दिए पानी कैसे पहुंचेगा

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कम दबाव के चलते तीसरी मंजिल तक भी नहीं चढ़ पाता है पानी, शहर में सैकड़ों हैं 5 मंजिला भवन, लोग झेलेंगे परेशानी संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। हर साल की तरह इस बार भी शहर में पानी का संकट गहराएगा। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से इसका कोई समाधान नहीं निकाला गया है। विभाग ने सेक्टरों में मंजूरी देकर बहु मंजिला और स्टिल्ट प्लस चार भवन तो बनवा दिए, लेकिन यहां तक पानी की आपूर्ति करने की कोई योजना नहीं होेने के कारण हालात बदतर होते जा रहे हैं। एचएसवीपी ने पानी के दामों में कुछ दिन पहले ही 20 फीसदी बढ़ोतरी की थी, एक अप्रैल से पांच फीसदी दाम फिर से बढ़ा दिए जाएंगे। मगर पानी सप्लाई के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। नाराज शहरवासियों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। लोगों के सामने समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। प्राधिकरण की तरफ से सुबह-शाम सप्लाई तो दी जाती है, मगर पानी का दबाव इतना भी नहीं रहता है कि पहली मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाता। सेक्टर-20 और सेक्टर-12 में तो अभी से पानी किल्लत की शिकायतें सामने आने लगी हैं। कम दबाव के कारण पहली और दूसरी मंजिल पर पानी नहीं पहुंचने की समस्या तो पूरे शहर में आम है।

स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवनों में भी रहेगी समस्या
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से शहर में स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवनों के निर्माण को धड़ाधड़ मंजूरी दी गई थी। करीब 150 भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, इतने का ही निर्माण कार्य भी चल रहा है। इनमें पानी सप्लाई के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
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लोगों का तर्क, दाम बढ़ा रहे हैं तो सुविधाएं भी बढ़े
शहरवासियों का कहना है कि जब प्राधिकरण हर साल पानी के दाम बढ़ा रहा है तो निश्चित रूप से सुविधाओं में भी इजाफा होना चाहिए। एचएसवीपी को अपना ढांचा मजबूत करना चाहिए और उन सभी फ्लोर तक पानी की सप्लाई दी जानी चाहिए, जहां तक निर्माण की मंजूरी प्राधिकरण की तरफ से दी गई है।


कोट्स
पिछले 40 साल से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं, मगर अधिकारी समाधान नहीं कर पा रहे हैं। कम दबाव तो रहता ही है साथ ही बिजली कटों के कारण पानी आपूर्ति बाधित रहती है। पानी आपूर्ति के लिए जेनरेटर सेट या सोलर संयंत्र लगाए जाने चाहिए। - एसके नैय्यर, अध्यक्ष, सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन


जब भी अधिकारियों को शिकायत की जाती है तो वे गोलमोल जवाब देते हैं। शहर में सभी लोग समय पर बिल जमा करवाते हैं तो उनको सुविधाओं का भी पूरा अधिकार है। कब दबाव के कारण शहरवासियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। गर्मियों में तो हालात भयावह हो जाते हैं। - आरपी मल्होत्रा, अध्यक्ष फोरा

सोसायटियों में तो अभी से पानी की किल्लत की शिकायतें आने लगी हैं। उनके टैंक नहीं भर पा रहे हैं। सेक्टर-20 के साथ लगते गांवों में भी कम दबाव की समस्या रहती है। इस बारे में हर बार अधिकारियों को अवगत कराया जाता है, मगर स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही रहती है। - योगेंदर क्वात्रा, उपप्रधान, आरडब्ल्यूए सेक्टर-20


पानी आपूर्ति की लाइनें पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। सेक्टर-12 में आए दिन लीकेज की समस्या बनी रहती है। लगातार बिल बढ़ाया जा रहा है तो ढांचा भी मजबूत किया जाना चाहिए। पानी बचाने और उपयोग करने के जो नियम बनाए जाते हैं, उनका सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। - कर्नल एसके दत्ता, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए सेक्टर-12
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नियमों के अनुसार प्राधिकरण की जिम्मेवारी लोगों के घर तक पानी पहुंचाने की है। ऊपरी मंजिलों तक पानी के लिए घरों में टैंक बनाकर मोटर की मदद से पानी चढ़ाया जा सकता है। फिलहाल पानी सप्लाई को लेकर कोई नई विशेष योजना नहीं है। - कैलाश काला, एसडीओ, एचएसवीपी
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