पंचकूला। जिला पुलिस की नाकामी के कारण अब महिलाओं ने हरियाणा राज्य महिला आयोग की शरण ले ली है। नतीजन हरियाणा राज्य महिला आयोग के पास अप्रैल से लेकर दिसंबर तक महिलाओं के उत्पीड़न और दहेज के साथ सेक्सुअल हरासमेंट के करीब 73 मामले आए हैं। इसमें से अब तक आयोग ने 53 मामलों का निपटारा भी करवा दिया है। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने 72 फीसदी मामलों का निपटारा किया है।
पंचकूला में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज की मांग और पुलिस के खिलाफ पूछताछ के दौरान अभद्रता की शिकायत के विवाद हरियाणा राज्य महिला आयोग के सम्मुख आए थे। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने मामले के निस्तारण को लेकर लगातार सुनवाई की। आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष प्रीति भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष अप्रैल से लेकर 31 दिसंबर 2020 तक 73 केस सामने आए थे। इसमें घरेलू हिंसा के 21, उत्पीड़न के 23, दहेज मांगने के पांच केस, रेप केस एक, सेक्सुअल हरासमेंट के चार, पुलिस के खिलाफ तीन केस, धोखाधड़ी के दो केस सामने आए थे।
इसमें घरेलू हिंसा के 21 केसों में महिलाओं से मारपीट के केस में निपटारे से पहले लोगों की काउंसिलिंग की जाती है। पक्षों को सुनने के बाद जब दोनों पक्ष संतुष्ट होते हैं तब ही मामले का निपटारा किया जाता है। कई बार पुलिस के पास जाने के बाद लोगों से सही तरीके से पुलिस की ओर से बात नहीं की जाती है। तब वह महिला आयोग आते हैं। इस पर हमारा फर्ज बनता है कि हम उन्हें न्याय दिलाएं। यह न्याय के लिए कोई भी महिला हरियाणा राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है। इसके लिए हम पूरी तरह से काम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।
मैंने देखा है कि महिलाओं के साथ उत्पीड़न के मामले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। हमारे पास 73 मामले आए हैं। इसमें से 72 फीसदी मामलों में सुलह करवा दी गई है। इसके अलावा कुछ मामलों में एफआईआर के लिए संस्तुति की गई है। - प्रीति भारद्वाज, चेयरपर्सन, हरियाणा राज्य महिला आयोग