चंडीगढ़। पंचायत चुनाव के दौरान पटियाला के एसएसपी के वायरल ऑडियो मामले की जांच में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आप जांच अनंत काल तक खींचना चाहते हैं। विशेष जांच टीम द्वारा अब तक रिपोर्ट दाखिल न किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए तीन सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से जुड़े मामलों को ऐसे लंबित नहीं रखा जा सकता। पंचायत चुनावों से संबंधित इस गंभीर प्रकरण में जांच तेजी से होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य चुनाव आयोग इस दायित्व का निर्वहन करने में विफल रहा है।
खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 10 दिसंबर को दिए गए आदेश में स्वतंत्र एफएसएल से जांच की जो उम्मीदें और अपेक्षाएं व्यक्त की गई थीं, वे अब तक पूरी नहीं हुई हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित एसआईटी ने अब तक अपनी रिपोर्ट तैयार ही नहीं की है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि एसआईटी, ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी का इंतजार कर रही है।
कोर्ट ने कहा कि कितनी बार लिखें? कब तक इंतजार करेंगे? एक, दो, तीन रिमाइंडर दीजिए और अगर फिर भी जवाब नहीं आता, तो आगे बढ़िए। कोर्ट ने कहा कि हम जिम्मेदारी आप पर तय करेंगे, किसी तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर नहीं।
अदालत पूर्व विधायक दलजीत सिंह चीमा, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इस मामले में पंजाब पुलिस पर आरोप हैं और वही जांच कर रही है, जो स्पष्ट रूप से हितों के टकराव को दर्शाता है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक नेता प्रतिपक्ष के बयान के मामले में बिना किसी एफआईआर या औपचारिक शिकायत के केवल दो दिनों में पंजाब एफएसएल से जांच करवाई गई और वीडियो को एडिटेड घोषित कर दिया गया।