चंडीगढ़। पंजाब के एडवोकेट जनरल कार्यालय में लॉ अफसरों की नियुक्ति के दौरान 51 पदों पर आरक्षण का प्रावधान करने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट मेंं चुनौती दी गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी वकील विकास बिश्नोई ने हाईकोर्ट को बताया कि हाल ही में पंजाब एडवोकेट जनरल कार्यालय ने लॉ अफसरों को रखने के लिए विज्ञापन निकाला था। इसके बाद लॉ अधिकारियों की सूची जारी की गई जिन्हें रखने का निर्णय लिया गया था। याची ने पाया कि इसमें 51 पद आरक्षित थे। याची ने कहा कि आरक्षण का प्रावधान केवल तब होता है जब नियुक्ति सार्वजनिक होती है। लॉ अफसरों को रखना किसी नौकरी की परिभाषा में नहीं आता है। यह तो विशेषज्ञों की सेवा लेना है। लॉ ऑफिसर को कर्मचारी नहीं माना जा सकता और ऐसे में नियोक्ता और कर्मचारी का रिश्ता नहीं बनता है।
याची ने बताया कि हरियाणा एजी कार्यालय में लॉ अफसरों को रखते हुए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ऐसा कर रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि एजी कार्यालय में सबसे अच्छे वकील होने चाहिए। पंजाब सरकार तो तय प्रक्रिया का पालन तक नहीं कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान जब नाम तय किए जाते हैंं तो इन्हें पहले चीफ जस्टिस के पास भेजा जाना चाहिए। इसके बाद चीफ जस्टिस इन नामों को अंतिम रूप देने के लिए कमेटी गठित करें और इसके बाद सरकार लॉ अफसरों पर अंतिम निर्णय ले।
हाईकोर्ट ने अब इस मामले में याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए इन सभी पहलुओं पर जवाब मांगा है। साथ ही हाईकोर्ट ने आरक्षित पदों पर रखे गए लॉ अफसरों को भी नोटिस जारी कर दिया है।