शुगर अनकंट्रोल होने पर डायबिटीज के मरीजों में होने वाली चारकोट बीमारी काफी गंभीर है। इसमें मरीज की हड्डियां टूट जाती हैं और मरीज को पता भी नहीं चलता। एक स्थिति ऐसी आती है कि जब मरीज का पैर काटने के बजाय कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।
पीजीआई में आयोजित एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट व यूके की मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के सहयोग से दो दिवसीय इंटरनेशनल डायबिटिक फुट कांफ्रेंस में चेन्नई से हिस्सा लेने आए पैरों के सर्जन डॉ. राजेश केशवानी ने कहा कि अब इसका इलाज उपलब्ध है।
पैरों के ट्रेंड सर्जन हड्डियों को जोड़ने में कामयाब रहे हैं। वे अब तक 100 से ज्यादा मरीजों को पैरों पर खड़ा कर चुके हैं। ये वे मरीज थे, जो चारकोट से पीड़ित थे और उनका दोबारा से पैरों पर खड़ा होना संभव नहीं था। यह काम ट्रेंड सर्जन ही कर सकते हैं। इसके लिए विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता पड़ती है। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पीजीआई के प्रो. अनिल भंसाली काफी उत्सुक हैं कि उनके यहां भी इस तरह के केस ठीक किए जाएं।
70 फीसदी को दोबारा से होता है अल्सर
डॉ. राजेश केशवानी का कहना है कि जिन मरीजों में एक बार अल्सर हो जाता है, उनमें से 70 फीसदी मरीजों में दोबारा से अल्सर होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों के लिए वे खास तरह के चप्पल व जूते बनाए जाते हैं। जो दोबारा से होने वाले अल्सर की संभावना को खत्म कर देते हैं। उनका कहना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए सिर्फ कुछ कदम उठाए जाने की जरूरत है। यदि मरीज सख्ती से उसका पालन करे तो कभी भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी।
यह कदम उठाएं
- शुगर को कंट्रोल में रखें।
- पैरों की साल में एक बार जरूर जांच करवाएं।
- पैरों को हमेशा गुनगुने पानी में धोएं।
- तेज गर्म पानी का उपयोग न करें।
- पैरों को हल्के हाथों से साफ कपड़े से साफ करें।
- दो अंगूठों के बीच के स्पेस को जरूर साफ करें।
- पैर के नाखूनों को राउंड शेप देने से बचें।
- जूते और फुटवियर बहुत ही सॉफ्ट और आरामदायक होने चाहिए।
- नंगे पैर बिल्कुल न चलें। घर हो या पार्क।
- जूते रात के वक्त ही खरीदें।