एसीबी ने जीपीआर सर्वे में फंड दुरुपयोग व टेंडर अनियमितताओं को लेकर दर्ज की एफआईआर
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा के पुरातत्व विभाग में कथित तौर पर सरकारी फंड के दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिनानी भट्टाचार्य और आईआईटी कानपुर से जुड़े जावेद के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। मामला ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार (जीपीआर) सर्वे से जुड़े ठेकों में कथित गड़बड़ियों और वर्ष 2014 से 2023 के बीच फंड के हेरफेर से संबंधित बताया जा रहा है।
एसीबी के डिप्टी एसपी शुकर पाल ने बताया कि शिकायतों की प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसी ने पुरातत्व विभाग से जीपीआर सर्वे से संबंधित सभी फाइलें तलब की हैं। इनमें अन्य कंपनियों के कोटेशन और टेंडर से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। दोनों आरोपियों को जल्द ही जांच में शामिल किया जाएगा। एसीबी ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों व दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
केस-1 : ओपन टेंडर के बिना ठेका देने का आरोप
शिकायतकर्ता सिद्धार्थ गौरी के अनुसार डॉ. बिनानी भट्टाचार्य ने करीब 47 लाख रुपये से अधिक का जीपीआर सर्वे का ठेका बिना ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाए सीधे जावेद को दे दिया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में न तो सरकारी ई-मार्केट प्लेस (जीईएम) का उपयोग किया गया और न ही प्रतिस्पर्धी निविदाएं आमंत्रित की गईं जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
केस-2 : नियुक्ति और वेतन वृद्धि में अनियमितताओं का आरोप
दूसरी शिकायतकर्ता सोमा रानी ने 25 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में डॉ. भट्टाचार्य की नियुक्ति और वेतन वृद्धि को नियमों के विरुद्ध बताया। शिकायत के अनुसार 2015 में डिप्टी डायरेक्टर पद के लिए जारी विज्ञापन केवल सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए था जबकि डॉ. भट्टाचार्य उस समय सेवानिवृत्त नहीं थीं। साथ ही आवश्यक अनुभव की शर्तें भी पूरी नहीं की गईं। शिकायत में अन्य अधिकारियों पर तथ्यों को छिपाने और शिकायतों पर कार्रवाई न करने के आरोप भी लगाए गए हैं।