संवाद न्यूज एजेंसी पंचकूला/ कालका। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा को पत्र लिखकर कालका सब डिपो में बसों की संख्या और रोडवेज कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व चेयरमैन हरियाणा सरकार विजय बंसल ने कहा कि गत कई वर्षों से कालका में कमजोर नेतृत्व और सरकार की अनदेखी के कारण लोगों को परिवहन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इतना ही नहीं कालका के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बसे गांव धामसु, गवाही डखरोग, जबरोट, प्रेमपुरा, खोल फतेह सिंह, बाढ़ गोदाम और मोरनी ब्लाक के सभी गांवों की विशेषकर छात्राएं जंगल के रास्ते उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए बड़े स्कूलों में नहीं जा पा रही हैं, इससे सरकार की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना लागू नहीं हो पा रही है।
कालका को नहीं दी एक भी बस
विजय बंसल ने बताया कि हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 128 मिनी बसें शामिल की गई हैं। इसमें सभी जिलों को बसें दी गईं जबकि पहाड़ी क्षेत्र कालका को एक बस भी नहीं दी गई। सरकार ने उक्त बसें विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लाभ के लिए शामिल की जबकि दुर्गम क्षेत्रों पिंजौर, मोरनी के लिए एक भी बस नहीं उपलब्ध करवाई। उन्होंने बताया कालका, पिंजौर शहरों के साथ सटे बद्दी, बरोटीवाला, परवाणु, डेराबस्सी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन जाने वाले कर्मचारी पंचकूला, चंडीगढ़ के स्कूल, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में जाने वाले छात्र, अस्पताल जाने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कालका से चंडीगढ़ पीजीआई के लिए सीधी बस सर्विस न होने से भी मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा रोडवेज ने सीधी बस सर्विस मुहैया नहीं करवाई। इतना ही नहीं विजय बंसल ने गत वर्ष चंडीगढ़ प्रशासन से सीटीयू की बस पीजीआई चंडीगढ़ से कालका तक चलाने की मांग भी की थी परंतु आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इतना ही नहीं हरियाणा सरकार को भी बस सर्विस मुहैया करवाने के लिए लिखा था।
कभी होती थीं 100 बसें
तीन दशक पूर्व कालका से चंडीगढ़, अंबाला, शिमला, दिल्ली और अन्य लंबे मार्गों को जाने वाली रोडवेज की बसों की संख्या करीब 100 होती थी। इस दौरान कालका क्षेत्र की जनसंख्या कई गुना बढ़ी लेकिन रोडवेज बसों की संख्या घटकर मात्र 45 रह गई है। परिणाम स्वरूप लोकल रूट पंचकूला, चंडीगढ़, बद्दी सहित लंबे मार्ग पर जाने वाले यात्रियों विशेषकर छात्रों, कर्मचारियों को मजबूरन जान जोखिम में डालकर ओवरलोड ऑटो-रिक्शा, टैक्सी आदि अन्य वाहनों पर अधिक राशि खर्च कर अपने गंतव्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है। इससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।