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Panchkula News: पंचकूला के 52 गांवों को पेराफेरी एक्ट से बाहर करने की मांग

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सरपंच एसोसिएशन ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, जमीन पर निर्माण और खरीद-फरोख्त में आ रही दिक्कतें गिनाईं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। सरपंच एसोसिएशन जिला पंचकूला ने समाधान शिविर के माध्यम से उपायुक्त पंचकूला को ज्ञापन सौंपकर जिले के 52 गांवों को पेराफेरी एक्ट से बाहर करने की मांग उठाई। एसोसिएशन ने कहा कि इस एक्ट के कारण ग्रामीणों को अपनी जमीन पर निर्माण और जरूरत के अनुसार जमीन की खरीद-फरोख्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एसोसिएशन के प्रधान करण सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ शहर बसाए जाने के समय मास्टर प्लान के तहत आउटर बाउंड्री से 30 किलोमीटर के दायरे को शामिल किया गया था, जिसमें करीब 154 गांव आते थे। समय के साथ शहरीकरण बढ़ने पर मोहाली, पंचकूला और खरड़ के 102 गांवों से पेराफेरी एक्ट हटा लिया गया, लेकिन पंचकूला जिले के 52 गांव अब भी इसके दायरे में हैं।
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उन्होंने कहा कि पेराफेरी एक्ट के चलते किसान अपनी निजी खेती की जमीन पर मकान नहीं बना सकते और न ही घरेलू जरूरतों के लिए जमीन के छोटे हिस्से बेच सकते हैं। नियमों के उल्लंघन पर डीटीपी विभाग की कार्रवाई और मुकदमों का सामना करना पड़ता है, जिससे लोगों को आर्थिक और कानूनी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि आजादी के बाद जनसंख्या तेजी से बढ़ी है और लोगों ने शादी-विवाह, बीमारी, पढ़ाई और आवास जैसी जरूरतों के लिए जमीन के छोटे हिस्सों की खरीद-फरोख्त शुरू की, लेकिन लाल डोरा का विस्तार नहीं किया गया। एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि जब 102 गांवों से पेराफेरी एक्ट हटाया जा चुका है तो 52 गांवों को अब तक इससे बाहर क्यों नहीं किया गया।
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एसोसिएशन ने प्रशासन से मामले की जांच कर पंचकूला जिले के शेष 52 गांवों को भी पेराफेरी एक्ट से बाहर करने की मांग की, ताकि ग्रामीण अपनी निजी भूमि का उपयोग जरूरत के अनुसार कर सकें।
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