1991 के बलवंत सिंह अपहरण और हत्या मामले में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उच्च न्यायालय का विस्तृत फैसला आ गया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यदि जांच सीबीआई को सौंपी गई तो जांच में देरी संभव है, जिसका लाभ पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को मिल सकता है। केस के सभी सबूत पंजाब सरकार के पास हैं और गवाहों का सरकार द्वारा गठित एसआईटी के समक्ष पेश होना ज्यादा आसान रहेगा।
जस्टिस फतेहदीप सिंह सैनी द्वारा अपने खिलाफ दर्ज मामले की सीबीआई जांच और केस रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका 8 सितंबर को ही खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ सैनी सुप्रीम कोर्ट में भी जा चुके हैं, लेकिन उच्च न्यायालय का विस्तृत फैसला सोमवार को आया है।
जस्टिस फतेदीप सिंह ने कहा कि जब इस केस के सभी सबूत और गवाह पंजाब सरकार के पास हैं तो ऐसे में जांच सीबीआई को सौंपना इस केस की जांच में देरी का कारण बनेगा। न्यायालय ने कहा कि याची पर संगीन आरोप है समाज का न्याय केे प्रति विश्वास बना रहे किस लिए जांच बेहद आवश्यक है।
जिस पर मौलिक अधिकारों की रक्षा का था दारोमदार, उसने ही खराब की फोर्स की छवि
उच्च न्यायालय ने कहा कि याची राज्य की पुलिस का मुखिया रहा है, जिस पर एक सामान्य नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा का दारोमदार था। ऐसे अधिकारी पर मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप है और इस भी इस हद तक कि एक अमूल्य जीवन समाप्त हो गया। उन्होंने न सिर्फ फोर्स की छवि खराब की है।
अपनी उस शपथ को भुला दिया जिसके तहत उन्हें जनता का संरक्षक बनना था। न्यायालय में इस केस का जो रिकॉर्ड सौंपा गया उसके तहत याचिकाकर्ता दया का पात्र नहीं है। ऐसे में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग और मई में दर्ज की गई एफआईआर को रद्द किए करने से इनकार करते हुए न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी ।