चंडीगढ़। हरियाणा की मंडियों में एक अप्रैल से होने वाली खरीद के दौरान किसानों को भुगतान में देरी नहीं की जाएगी। यदि देरी होती है तो लगभग 9 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा। यह भुगतान किसानों के सत्यापित बैंक खातों में सीधे किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंडियों में होेने वाली खरीद को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी मौजूद थे।
मालूम हो कि पिछली बार की शिकायतों से सबक लेते हुए सरकार इस बार खरीद में कोई अड़चन नहीं आने देना चाहती। मनोहर लाल ने कहा कि किसानों को एक निर्धारित समय अवधि के भीतर खरीदी गई उपज का भुगतान किया जाना सुनिश्चित किया जाए। भुगतान में देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय पर भुगतान हो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारियां तय की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने फसलों की सुचारु खरीद के लिए किए जा रहे प्रबंधों की समीक्षा की और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसानों को मंडियों में अपनी उपज बेचते समय किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए पूर्व में ही सारी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि कोविड को देखते हुए पिछले वर्ष की तरह इस बार भी खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। गेहूं और सरसों की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी जबकि अन्य फसलों की खरीद 10 अप्रैल से आरंभ होगी। खरीद केंद्रों की स्थापना के लिए जल्द से जल्द स्थानों क ी पहचान कर ली जाए।
मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करने लिए सरकार ने मंडियों में मजदूरों की उपलब्धता, धर्म कांटा, बारदाना और सिलाई मशीन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है। पिछली बार रकम आढ़तियों के खाते में गई थी, इस बार ऐसा नहीं किया जाएगा। पिछली बार की घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने अधिकारियाें को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
सीएम ने कहा है कि मंडियों पर परिवहन की व्यापक व्यवस्था की जाए। यदि कोई ट्रांसपोर्टर 48 घंटे के भीतर फसल का उठान करने में विफल रहता है, तो उपायुक्त अन्य वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था कर फसल का उठान सुनिश्चित करेंगे। सभी जिलों के डीसी को स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं।