कोर्ट ने कहा- बैंकिंग धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज आर्थिक अपराध, आरोपी पर 29 अन्य मामले भी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में फर्जी सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने के दो मामलों में मुख्य आरोपी दीपक भोला की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि बैंकिंग धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे आर्थिक अपराध वित्तीय संस्थानों को नुकसान पहुंचाने के साथ देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत गंभीर आरोप हैं। इनमें धारा 467 में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
मामले के अनुसार, सेक्टर-14 थाने में दर्ज दोनों एफआईआर में आरोप है कि बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपये के गोल्ड लोन लिए गए। किस्तें नहीं चुकाने पर बैंक ने गिरवी सोने की नीलामी शुरू की तो जांच में उसके नकली होने का खुलासा हुआ। सरकारी वकील ने बताया कि भोला के खिलाफ इसी तरह के 29 अन्य मामले दर्ज हैं। आरोप है कि उसने सह-आरोपियों के साथ मिलकर नकली सोने को असली बताकर प्रमाणपत्र जारी किए, जिनके आधार पर बैंक ने लोन मंजूर किए। बचाव पक्ष ने उसे बैंक का पैनल मूल्यांकक बताते हुए कहा कि वह 10 जनवरी 2025 से जेल में है। अदालत ने तथ्यों को देखते हुए दोनों मामलों में जमानत अर्जी खारिज कर दी।