पंचकूला नगर निगम के 158 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वित्त विभाग की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की साजिश कोरोना काल के दौरान रची गई और 2018 से 2026 के बीच बेनामी खातों के जरिए एफडी में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया।
जांच के अनुसार, कोटक महिंद्रा बैंक के साथ निगम के बैंकिंग संबंध 2018 में शुरू हुए लेकिन घोटाले का असली खेल 28 मई 2020 को शुरू हुआ। इसी दिन सेक्टर-11 स्थित बैंक शाखा में निगम के नाम पर एक गुप्त खाता (नंबर 2015073031) सक्रिय किया गया, जिसका निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था। इसके बाद 2022 में दो और खाते (नंबर 2046279112 और 2046903758) खोले गए। आशंका है कि इन खातों के जरिए एफडी की रकम को घुमाकर बाहर निकाला गया।
चार खातों से चला पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि निगम के नाम पर कुल चार खाते संचालित हो रहे थे, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल दो खातों का ही जिक्र था। एफडी की राशि सीधे ट्रांसफर करने के बजाय पहले इन गुप्त खातों में डाली जाती थी जिससे हेरफेर लंबे समय तक छिपा रहा।
खाता संख्या 2015073031 (28 मई 2020 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2046279112 (8 जून 2022 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2013457703 (27 अक्तूबर 2018 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2046903758 (26 अगस्त 2022 से 25 मार्च 2026)
वित्त विभाग की जांच में खुला खेल
घोटाले की भनक लगने पर वित्त विभाग ने 18 फरवरी और 17 मार्च 2026 को विशेष जांच समिति गठित की। जांच में पाया गया कि जिस खाते में 50.07 करोड़ रुपये होने चाहिए थे, वहां केवल 2.17 करोड़ रुपये ही बचे थे। इसके बाद विजिलेंस ने जांच तेज कर दी।
आठ साल का रिकॉर्ड खंगाल रही विजिलेंस
विजिलेंस टीम ने 2018 से 2026 तक के सभी बैंकिंग और दस्तावेजी रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं। अब यह जांच की जा रही है कि इतने लंबे समय तक ऑडिट के दौरान इन खातों और लेन-देन की गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई। साथ ही गिरफ्तार आरोपी दिलीप सिंह राघव के 2018 से अब तक के संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।