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ये मेरी नहीं, हर निर्भया व रुचिका की लड़ाई है

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साहसी बेटी बोली-ये मेरी नहीं, हर निर्भया व रुचिका की लड़ाई है

किया शुक्रिया-लोगों के समर्थन के बिना ये लड़ाई संभव नहीं थी
अपराधियों के सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद साहसी बेटी व पिता ने साझा किए अनुभव

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। छेड़खानी के आरोपी विकास बराला और आशीष कुमार के सलाखों के पीछेचले जाने के बाद साहसी युवती वर्णिका और उसके आईएएस पिता ने बीते सात दिनों के अनुभव फेसबुक पर लिखे हैं। वर्णिका ने कहा कि बीते सात दिन मेरे लिए काफी मुश्किल भरे थे। कई बार मैं टूटी। कमजोर पड़ी। लेकिन परिवार और लोगों के अपार समर्थन ने मुझे मजबूत किया। परिवार व रिश्तेदारों ने हर बार मेरा हौसला बढ़ाया। लोगों ने सवाल पूछा कि जो समर्थन व मदद मिल रही है, इस पर आप क्या सोचते हो? हर सवाल पर मेरा एक ही जवाब होता था कि मेरे साथ बड़ी सोच वाली फैमिली खड़ी है। वीरेंद्र कुंडू, सुचेता कुंडू, सात्विक कुंडू ये सब मेरी ताकत हैं। हर उस व्यक्ति को धन्यवाद कहना चाहूंगी, जो मेरे साथ खड़ा रहा। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि ऐसी वारदातों का सामना करने वाली निर्भया व रुचिका की है।
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हरियाणा के सीनियर आईएएस पिता ने जवाब में लिखा-
वर्णिका, सात्विक और सुचेता। मुझे आप सब फख्र है। आपने समाज के सबसे मुश्किल व भयावह परिस्थिति से लड़ने का चुनाव किया। यह बहुत ही मुश्किल फैसला था, इसे चुनना आसान नहीं था। अब ये केस कानूूनी तौर पर प्राथमिक कार्रवाई पूरी कर चुका है। इस संबंध में अपने कुछ विचार व भावनाओं को साझा कर रहा हूं। ये जरूरी है, क्योंकि इन छह दिनों ने जीवन के कई मायने बदल दिए हैं। यह संघर्ष अकेले शुरू हुआ था, लेकिन लोगों के समर्थन से यह लहर में तब्दील हो गया। समाज के एक बड़े समूह ने संघर्ष में खुलकर मदद की। अपराधियों की गिरफ्तारियां इस संघर्ष की शुरुआत हैं। लेकिन न्याय व हक का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। दोस्तों वास्तव में हम आपका आभार व्यक्त करते हैं। बिना आपके ये संघर्ष कामयाब नहीं होता। आपके बिना संघर्ष की यात्रा काफी मुश्किल होती।
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