अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बीती बुधवार शाम पबजी गेम खेलते समय दसवीं के छात्र की संदिग्ध मौत की गुत्थी पूरी तरह उलझ गई है। वजह है कि मृतक छात्र अर्शदीप के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिलना और न ही उसके मोबाइल से कोई संदिग्ध नंबर मिला है। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को कोई खास वजह नहीं मिली है। ऐसे में मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए आर्गन और ब्लड के सैंपल सीएफएसएल (सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) भेज दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
बीते बुधवार को सेक्टर-27 स्थित मकान नंबर 2063 में अर्शदीप की संदिग्ध परिस्थितियों मौत हो गई थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि अर्शदीप माता-पिता और बहन के साथ रहता था। वह सेक्टर-21 स्थित एक स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता अजय पाल सिंह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर सुपरिंटेंडेंट तैनात हैं। दोपहर को उसकी मां मार्केट चली गई और पिता अपने काम पर। इस दौरान उसकी बड़ी बहन ग्राउंड फ्लोर पर थी, जबकि अर्शदीप मकान के पहली मंजिल पर अपने कमरे में सोने चला गया। शाम को मां ने देखा कि कमरे का दरवाजा अंदर से लॉक है। परिजनों ने आवाज लगाते हुए दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। लोगों की मदद से दरवाजे को बमुश्किल खोला गया। परिजनों ने बताया गया कि अर्शदीप पबजी गेम खेलने का आदी था।
क्या है पबजी गेम
पबजी एक ऑनलाइन गेम है। इसमें 100 खिलाड़ी एक विमान से एक बड़े टापू पर छलांग लगाते हैं। सब के सब हथियार ढूंढकर एक दूसरे को मारना शुरू कर देते हैं। गेम को 4 लोग एक साथ खेल सकते हैं। हर खिलाड़ी का अंतिम लक्ष्य जिंदा बचे रहना होता है। गेम का पहला भाग पार करने पर इसकी लत लग जाती है कि कहीं गेम का लेवल घट न जाए। यही वजह है कि इसे पूरे दिन खेलने लग जाते हैं।
पबजी खेलने से पहले भी हो चुकी है मौत
मध्य प्रदेश के नीमच में भी पबजी गेम से बारहवीं के छात्र के मौत का मामला सामने आया। खबर है कि 16 वर्षीय छात्र पिछले डेढ़ साल से पबजी गेम खेलने का आदी था। मौत वाले दिन उसने लगातार 6 घंटे पबजी गेम खेला। बताया गया कि गेम खेलने के दौरान वह जोर जोर से चिल्लाता था कि मारो मारो ब्लास्ट हो जाएगा।