चोरी हुई बाइक पर होती पुलिस की नजर तो बच जाता हिमांशु
पुलिस की लापरवाही का फायदा उठा रहे अपराधी
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। शहर से चोरी होते वाहनों के अधिकांश मामले लटके रहते हैं। जिनके बारे में नाकों पर तैनात पुलिस भी बेखबर रहती है। अधिकतर आपराधिक लोग ऐसी वारदात को अंजाम देते हैं और पुलिस को उनका सुराग लगाने में महीनों लगा देती है। गौर हो कि 15 जून को थाने के पास स्थित एक गन हाउस के बाहर से बाइक चोरी हुई थी। इसकी तलाश नहीं नहीं गई। इसका फायदा हत्यारोपियों ने उठाया और चोरी के उसी बाइक से आकर शराब ठेकेदार हिमांशु से पांच लाख की नकदी लूटी और उसकी गोली मार हत्या कर दी। इसका खुलासा शनिवार को देर शाम सिटी थाना-1 की पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर नंबर 332 से हुआ है। अगर पुलिस डेढ़ माह पहले चोरी हुए वाहनों पर नजर रखते हुए नाकों पर चौकसी बरतती तो हिमांशु दानिया की जान बच जाती और आरोपी पकड़े जाते।
सिटी थाना-1 की पुलिस की एफआईआर नंबर 332 के अनुसार रिंकू सिंह पुत्र सुखराम सिंह निवासी प्रेम नगर बरनाला ने 15 जून को पुलिस को सूचना दी थी कि वर्मा गन हाउस के पास से उसकी बाइक चोरी हो गई है। इस बारे में पुलिस ने शिकायत पर 1030/एलपीसी नंबर तो दर्ज कर दिया था। लेकिन नाकों पर तैनात जवानों को कोई सूचना नहीं दी। जब शनिवार को बाद दोपहर जिला पुलिस मुखी हरजीत सिंह ने 5 जुलाई की रात हुई शराब ठेकेदार हिमांशु दानिया की हत्या की गुत्थी सुलझाई गई और हत्यारों द्वारा इस्तेमाल मोटरसाइकिल के मालिक की पुलिस ने तलाश की तो यह मामला क्लीयर हुआ।
डेढ़ महीने बाद किया चोरी हुए वाहनों का मामला दर्ज
सिटी थाना-1 के प्रभारी इंस्पेक्टर गुरवीर सिंह का कहना है कि हिमांशु के हत्यारों का पता लगने के बाद शहर से चोरी हुए दोपहिया वाहनों के रिकार्ड खंगाले गए। जिसमें पाया गया कि 15 जून को जिस रिंकू सिंह का मोटरसाइकिल चोरी हुआ था उसका चेसिस नंबर शिकायत पत्र से मिलान कर रहा था। पुष्टि होने के बाद हिमांशु के हत्यारों धनौला निवासी सुखपाल सिंह व कर्मजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।