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ऑर्बिट बस कांड - अदालत ने झूठी शहादत देने पर घटना की चश्मदीद गवाह मृतका की मां -बेटा तलब

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अदालत में पेश नहीं हुए मृतका की मां और बेटा
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ऑर्बिट बस कांड की सुनवाई के दौरान झूठी शहादत देने का आरोप
अब अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को तय
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा।
एडिशनल जिला एवं सेशन जज लखविंदर कौर दुग्गल की अदालत में बुधवार को पीड़ित पक्ष पेश नहीं हुआ। ऑर्बिट बस कांड की सुनवाई के दौरान मृतका की मां और बेटे पर झूठी शहादत देने का आरोप है। अब अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 अक्तूबर की तारीख तय की है। केस से बरी हुए आरोपी ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए भी अदालत में अर्जी दी है। अदालत ने बीती 17 जुलाई को केस में नामजद चारों आरोपियों को सबूतों के अभाव से बरी कर दिया था।
अदालत में झूठी शहादत देने के आरोप में 10 अगस्त को घटना की चश्मदीद गवाह मृतका की मां छिंदर कौर और उसके बेटे अकाशदीप को 27 सितंबर को तलब किया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए।
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थाना बाघापुराना में 29 अप्रैल 2015 को बादल परिवार की मालकी वाली ऑर्बिट बस में छेड़छाड़ के बाद चलती बस से नाबालिग अर्शदीप कौर निवासी गांव लंढेके को कथित तौर पर फेंक कर मारने के आरोप में बस चालक रणजीत सिंह, कंडक्टर सुखविंदर सिंह उर्फ पंमा, हाकर गुरदीप सिंह और अमर राज उर्फ दाना पर केस दर्ज किया गया था। इस दौरान में गंभीर घायल हुई मृतका की मां छिंदर कौर और उसका बेटा अकाशदीप सिंह चश्मदीद गवाह थे, हालांकि पिता सुखदेव सिंह भी गवाह था।
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एडिशनल जिला एवं सेशन जज की अदालत में बस कांड की सुनवाई के दौरान सुखदेव सिंह और छिंदर कौर पुलिस के पास दिए बयानों से पलट गए थे। अदालत में सुखदेव सिंह ने पुलिस की कहानी से पलटते कह दिया था कि उसे घटना के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। इस घटना की जांच के लिए सरकार की ओर से स्थापित जस्टिस बीके बाली आयोग भी दंपति के पेश होने से काफी अरसा टालमटोल करता रहा और काफी लेट पेश हुआ था।



फाइल फोटो कैप्शन - खड़ी चर्चित ऑर्बिट बस की फाइल फोटो
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