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कोर्ट ने महिला मैनेजर के 164 के बयान की अर्जी की खारिज

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सेक्टर-5 की एक सैलून की महिला मैनेजर का शारीरिक शोषण और पैसों की उगाही के मामले में सीआरपीसी-164 के बयान दोबारा दिलाने के लिए शनिवार को कोर्ट ले जाया गया। मजिस्ट्रेट ने महिला के 164 के बयान दोबारा रिकॉर्ड किए जाने की अर्जी को खारिज कर दिया। इस दौरान मामला अचानक ठहर सा गया। इसके बाद कोर्ट में साथ गए एमडीसी थाने के नवनियुक्त एसएचओ दीपक और एक महिला कांस्टेबल महिला मैनेजर को कोर्ट से बाहर ले आई। इस स्थिति में स्पष्ट है कि महिला मैनेजर के मजिस्ट्रेट के समक्ष पहले दिए 164 के बयान ही ऑन रिकॉर्ड हैं। हालांकि, कोर्ट में दोबारा बयान दर्ज कराने से पूर्व महिला मैनेजर पुलिस को सीआरपीसी 161 के तहत आरोपी होमगार्ड जवान जसनपाल और एमडीसी थाने के पूर्व एसएचओ रविकांत के खिलाफ बयान दे चुकी हैं। इन बयानों में महिला ने कहा कि होमगार्ड जवान उससे मंथली वसूली के अलावा छेड़छाड़ भी करता था। साथ ही एसएचओ भी उससे मिला हुआ था। बयान दिए हैं कि आरोपी एसएचओ ने उसे होटल भी बुलाया था। महिला ने आरोप लगाए हैं कि दोनों पुलिसकर्मियों ने उन्हें उनके सैलून के नीचे बुलाकर साथ चलने को भी कहा था। होमगार्ड जसनपाल पर आरोप लगाए हैं कि वह उनसे पैसे तो लेता ही था लेकिन छेड़छाड़ भी करता था। महिला मैनेजर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करवाने को तैयार है लेकिन कोर्ट ने उसके 164 के बयान दोबारा रिकॉर्ड करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। हालांकि आईजी भारती अरोड़ा मामले की जांच में जुटी हैं। महिला मैनेजर के बयान और अन्य एविडेंस सहित आईजी जांच रिपोर्ट को एक सप्ताह में सौंपेंगी। मामले पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज नजर बनाए हुए हैं। उन्हीं के निर्देशों पर मामले की इंक्वायरी मार्क की गई है। मामले का आरोपी होमगार्ड जसनपाल न्यायिक हिरासत में है और आरोपी इंस्पेक्टर रविकांत फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
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सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग है मजबूत एविडेंस
मामले की वायरल हुई सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग केस की मजबूत कड़ी है। इस संबंध में वकीलों से बात की गई तो उन्होंने इन एविडेंस को मजबूत बताया। कहा कि पैसों की जबरन वसूली और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के आरोप इन एविडेंस के बूते साबित हो सकते हैं। हालांकि, छेड़छाड़ के आरोप महिला मैनेजर की स्टेटमेंट पर ही निर्भर करेंगे।
मामले में अब तीन विकल्प हैं मौजूद
1. सीआरपीसी 164 के बयान दोबारा रिकॉर्ड कराने के लिए वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर कर सकती है।
2. केस के ट्रायल के दौरान स्वतंत्र होकर स्टेटमेंट रिकॉर्ड करवाएगी।
3. पुलिस द्वारा कोर्ट में दायर की जाने वाली चार्जशीट पर भी केस की मजबूती निर्भर करेगी। पुलिस की चार्जशीट में किस पर, किस माध्यम से क्या आरोप दर्शाए जाएंगे, उसके मुताबिक कोर्ट की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। फिर ट्रायल के दौरान महिला मैनेजर की स्टेटमेंट अहम होगी।
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जिंदगी खराब कर देने की दी थी धमकी
महिला ने आरोप लगाए हैं कि होमगार्ड जवान जसनपाल ने उन्हें जिंदगी खराब कर देने की धमकी दी थी। महिला को धमकी दी थी कि यदि वह उनके खिलाफ बयान देगी तो वह उसे कहीं का नहीं छोड़ेगा और उसका घर उजाड़ देगा। होमगार्ड जवान ने महिला मैनेजर को उसकी पहुंच ऊपर तक होने का डरावा दिया था।
कोर्ट पहले की कई बार 164 के बयान दो बार लेती रही है। हालांकि, महिला मैनेजर के पास कोर्ट के बयान रिकॉर्ड करने के डिनायल ऑर्डर के अगेंस्ट हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर करने का विकल्प मौजूद है। मामले में पब्लिक प्रोसिक्यूटर भी 319 के तहत अर्जी दायर कर मामले से संबंधित किसी गवाह व अन्य को शामिल करवा सकता है। - प्रमोद भारद्वाज, प्रेसिडेंट, जिला बार एसोसिएशन, पंचकूला।
केस की मजबूती साइंटिफिक एविडेंस है। होमगार्ड जवान और एसएचओ की मोबाइल पर बातचीत के आधार पर पुलिस उनके वॉयस सैंपल लैब भेज सकती है। ताकि स्पष्ट हो सके कि मामले के संबंध में उन्हीं की बातचीत हुई है। इसके अलावा सीसीटीवी वीडियो की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। केस के ट्रायल के दौरान पीड़िता अपनी स्टेटमेंट रिकॉर्ड करवा सकती है। - हरीश भारद्वाज, वरिष्ठ वकील, जिला अदालत, चंडीगढ़।
यह था मामला:
डीजीपी कार्यालय में एमडीसी थाने के एसएचओ रविकांत और होमगार्ड जवान जसनपाल के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे सैलून की महिला मैनेजर का शारीरिक शोषण करने सहित मंथली वसूली करते हैं। इसके तुरंत बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया। एमडीसी थाना एसएचओ रविकांत को लाइन हाजिर कर निलंबित किया गया और होमगार्ड जवान जसनपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन पीड़िता ने सीआरपीसी-164 के तहत दिए अपने बयानों में जसनपाल से पारिवारिक रिश्ते होने और परिवार के किसी काम के लिए पैसे देने की बात कही थी। उन्होंने उनसे छेड़छाड़ होने की बात को सिरे से खारिज किया था। लेकिन इसके बाद महिला ने फिर कहा था कि उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मियों के बढ़ते दबाव और उनसे डरकर 164 के बयान दिए थे। इस कारण महिला मैनेजर ने दोबारा सीआरपीसी-164 के तहत बयान रिकॉर्ड कराने को पुलिस को अर्जी दी थी। लेकिन कोर्ट ने शनिवार को बयान दोबारा रिकॉर्ड करने की अर्जी को खारिज कर दिया।
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