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चेक बाउंस के मामलों में सजा सुनाने से पहले आरोपी का इतिहास जाने अदालतें: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सभी अदालतों को आदेश दिया है कि चेक बाउंस मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद के सजा सुनाने से पहले आरोपी का इतिहास जान लें। यदि कैदी पहले से जेल में है तो सुनाई जाने वाली सजा पहले से चल रही सजा के साथ चलेगी या इसके समाप्त होने के बाद शुरू होगी इस पर विवेक के अनुरूप निर्णय लिया जाए। याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मनोज जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि चेक बाउंस के 10 मामलों में उसे विभिन्न अवधि की सजा सुनाई गई है। 3 मामलों को छोड़कर सजा साथ में चलेगी या नहीं यह जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में आदेश में स्पष्ट जिक्र न होने के चलते उसे कुल 12 साल की सजा काटनी होगी। याची ने अपील की कि इन सभी सजाओं को एक साथ गिनने का निर्देश दिया जाए।
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हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याची के खिलाफ किसी एक मामले से जुड़ी अलग-अलग शिकायत नहीं हैं, बल्कि यह सब अलग मामले हैं और शिकायतकर्ता भी अलग हैं। ऐसे में याची की सजा को समानांतर करने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता। याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले ने हमारा ध्यान अहम मुद्दे की तरफ खींचा है।
चेक बाउंस के मामले में ट्रायल के दौरान आपराधिक इतिहास को रिकॉर्ड पर लाने का प्रावधान नहीं है। ऐसा इसलिए होता है कि न्याय अधिकारी कहीं इससे प्रभावित न हो जाए। इस मामले में भी सजा सुनाने वाली अदालतों के संज्ञान में अन्य मामलों में मिली सजा को नहीं लाया गया जिसके चलते अलग-अलग सजा गिनने की स्थिति बन गई। ऐसे में अब सभी अधीनस्थ अदालतों को आदेश दिया जाता है कि चेक बाउंस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद और सजा सुनाने से पहले व्यक्ति का आपराधिक इतिहास को अदालत के समक्ष रखा जाए ताकि सजा समानांतर चलेगी या अलग-अलग इस पर निर्णय लिया जा सके।
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