सदन की बैठक में छोटे छोटे विकास कार्यों को लेकर चर्चा न हो इसके लिए मेयर ने तय किया था कि प्रत्येक मंगलवार को वार्ड कमेटी की बैठक की जाएगी। इसमें अधिकारियों की मौजूदगी में वार्ड के विकास के लिए चर्चा करने की बात कही गई थी।
कुछ दिन तो कमेटी की बैठक हुई, लेकिन उसके बाद अचानक से बंद हो गई। कुछ पार्षदों का कहना था कि जिन मुद्दों या विकास कार्यों पर बैठक में चर्चा होती थी, वह होते ही नहीं थे। इसके बाद फिर से बैठक में वही समस्याओं का जिक्र होता था।
सीनियर डिप्टी मेयर ने पूरे खर्च किए रुपये
शहर के विकास के लिए मेयर को 2 करोड़, सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड दिया जाता है। फिलहाल मेयर फंड में केवल 4.12 लाख रुपये बचे हैं। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का फंड खत्म हो चुका है। मेयर फंड का पूरा हिस्सा 2019 में उपयोग किया है। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का फंड 2018 में ही खर्च हो चुका है।
जेई-एसडीओ आगे पहुंचाते ही नहीं फाइल
वहीं फंड खर्च न होने के मामले में पार्षदों ने कहा कि वार्ड डेवलपमेंट के लिए कई इस्टीमेट बनाकर देते हैं, लेकिन फाइलें जेई और एसडीओ से आगे निकलती ही नहीं हैं। जब चीफ इंजीनियर से पूछते हैं तो उनका कहना होता है कि कोई वार्ड डेवलपमेंट के काम शेष नहीं हैं। ऐसे में हम जनता को कहते हैं कि हमारे पास फंड नहीं है और इधर हमारे खाते में फंड भी शो होता रहता है।
पार्षद फंड
राजेश कालिया 112.40
हरदीप सिंह 31.31
कंवरजीत सिंह 86.53
महेश इंदर सिंह 19.96
राजबाला मलिक 56.39
रविकांत शर्मा 33.93
सुनीता धवन 55.08
शीला देवी 40.34
फर्मीला 99.05
अरुण सूद 74.95
गुरुबक्ख रावत 43.67
सतीश कैंथ 105.57
चंद्रवती शुक्ला 57.27
हीरा नेगी 92.87
रविंदर कौर 15.93
राजेश गुप्ता 101.78
आशा जसवाल 29.65
देवेंदर सिंह बबला 37.65
दलीप शर्मा 69.19
शक्ति प्रकाश देवशाली 84.56
गुरप्रीत सिंह 74.38
देवेश मोदगिल 87.68
भरत शर्मा 63.21
अनिल दुबे 77.14
जगतार सिंह 56.79
विनोद अग्रवाल 31.96
नोट: फंड की राशि लाख रुपये में
अब एक करोड़ रुपये मिले उपहार में
प्रशासन की ओर से अतिरिक्त फंड मिलने के बाद सदन की बैठक में कमिश्नर केके यादव ने पार्षदों को अपने वार्ड में काम कराने के लिए एक करोड़ रुपये देने का एलान कर दिया। ऐसे में अब पार्षदों का फंड फिर से बचा रहेगा। फिलहाल पार्षदों के पास दो साल का समय है। दो साल का फंड भी पार्षदों को और मिलना है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए पार्षदों के पास बजट तो काफी है, लेकिन विकास कार्य कितने होते हैं, यह देखना होगा।
किसी भी पार्षद का वार्ड फंड रोका नहीं गया है। जो भी काम रोके गए हैं, वह वार्ड फंड से नहीं हो सकते हैं। फिलहाल शहर में निगम के फंड से भी काम करवाए जा रहे हैं। केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम