हरियाणा में रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार पंचकूला से लेकर फरीदाबाद तक चल रहा है। कोई ऐसा जिला नहीं, जहां रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा न किया जा रहा हो। बिल्डर्स, कॉलोनाइजर्स ने अफसरों से गठजोड़ कर कोरोना की आपदा को भी अवसर में बदल लिया। जिसका खुलासा सरकार के रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने से हुआ।
सरकार के पास अगर शिकायतें न आती तो यह गड़बड़ी यूं ही चलती रही। जिलों में बड़े से लेकर छोटे अफसर तक सब जांच के घेरे में हैं। अवैध कॉलोनियों का निर्माण कर इन्हें नियमित करवा बिल्डर्स, अधिकारियों और नेताओं ने सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया है।
सूत्रों के अनुसार कृषि क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां बसाई गई थीं, जिनकी रजिस्ट्रियां बड़े पैमाने पर सवा तीन माह में हुईं। राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर इन्हें रेगुलर करवाने के लिए रजिस्ट्री करवाई गईं। इसमें यदि किसी का नुकसान होगा तो वह या तो किसान जिस की भूमि पर यह कॉलोनियां बसाई गई हैं या फिर अपने जीवन भर की पूंजी लगाकर कॉलोनियों में प्लाट लेने वालों का।
किसानों से बयाने पर जमीन लेते हैं बिल्डर्स
बिल्डर ने किसानों से जमीन को बयाने पर ली है। इस पर प्लॉट काटकर रजिस्ट्री किसान से प्लॉट लेने वालों के नाम करवा दी गई। नियम के अनुसार अवैध कॉलोनी की स्थिति में कार्रवाई जमीन बेचने या फिर खरीदने वाले पर की जाती है। ऐसे में बिल्डर सीधे-सीधे बच जाते हैं।
कृषि भूमि पर काटी गई अवैध कालोनियां सरकार के रहमों करम पर होती हैं। कभी राजनीतिक संरक्षण के चलते यह कॉलोनियां नियमित कर दी जाती हैं तो कभी बुलडोजर चला दिया जाता है। इसमें अधिकारियों से लेकर नेताओं की मिलीभगत होती हैं। जहां पर अधिकारियों या नेताओं के प्लॉट होते हैं, वे कालोनियां जल्द से जल्द नियमित कर दी जाती हैं।
ऐसे लगता है सरकार को चूना
सामान्य स्थिति में यदि किसी बिल्डर को कोई कॉलोनी काटनी होती है तो उसके लिए कृषि भूमि को चेंज ऑफ लैंड यूज के माध्यम से परिवर्तित करना पड़ता है। जिसके लिए सरकार को फीस देनी पड़ती है। कॉलोनी बनाते हुए सभी विकास कार्य बिल्डर को करने पड़ते हैं।
अवैध कॉलोनी की स्थिति में सीएलयू की राशि बच जाती है और बिल्डर विकास कार्यों में पैसा खर्च न कर कॉलोनी को पक्का कराने का प्रयास करता है ताकि सभी विकास कार्य सरकार को करने पड़ें। इस स्थिति में सरकार को सबसे पहले सीएलयू से आने वाले राजस्व का नुकसान होता है, इसके बाद विकास कार्य करने के लिए सरकारी खजाने से खर्च करना पड़ता है।