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हीमोफीलिया की तर्ज पर एलएसडी बीमारी के इलाज हेतु नीति पर विचार करें हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़

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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हीमोफीलिया के इलाज के लिए हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश पर बनाई गई नीति की तर्ज पर लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर के इलाज हेतु नीति बनाने पर विचार करने के पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ को आदेश दिए हैं। साथ ही याचिका पर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
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जालंधर के अरविंद छाबड़ा सहित चार द्वारा दायर याचिका में न्यायालय को बताया गया कि उनमे से ही एक याचिकाकर्ता अभी छोटा बच्चा था जिसकी इसी बीमारी से मृत्यु हो चुकी हैं। याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट जासतेज सिंह अरोड़ा ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इलाज की स्थिति में भी लाखों रुपये प्रतिमाह का इस बीमारी पर खर्च आता है प्राइवेट अस्पताल का खर्च उठाना तो किसी आम आदमी के बस की बात नहीं। सरकार यदि नीति बनाए तो ऐसे मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। पीजीआई की ओर से सुनवाई में बताया गया कि उच्च न्यायालय ने हीमोफीलिया के इलाज के लिए नीति बनाने के आदेश दिए थे उसी तर्ज पर इस बीमारी के लिए भी आदेश जारी किए जा सकते हैं। इस पर उच्च न्यायालय ने अब इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए नीति बनाने पर गौर करने के आदेश दे दिए हैं।
क्या है लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर
लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर एक आनुवांशिक बीमारी है जो 7700 में से किसी एक को होती है। इस रोग में प्लीहा, यकृत, अस्थि मज्जा और कभी-कभी मस्तिष्क में अत्यधिक फैट जमा हो जाता है। यह विकार अक्सर रोगी के हाथों और पैरों में गंभीर दर्द का कारण बनता है शरीर में फैब्रिक रोग निर्माण के साथ, रक्त वाहिकाएं समय के साथ संकीर्ण होती हैं जिससे त्वचा, गुर्दे, दिल, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र बुरी तरह प्रभावित होते हैं।
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