चंडीगढ़। पंजाब में अभी तक बाढ़ की पांच बड़ी वजह बताई जा रही हैं। इनमें भारी बारिश, नदियों में उफान, तटबंधों का टूटना, ड्रेनेज सिस्टम फेल और प्राकृतिक असंतुलन शामिल है लेकिन इन कारणों के साथ-साथ दरियाओं में जमी गाद (सिल्ट) भी बाढ़ की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पंजाब सरकार भी इसे ही प्रमुख कारण मानते हुए इसका ठीकरा केंद्र सरकार के सिर फोड़ रही है।
दरियाओं की गाद न केवल सरकार बल्कि नदियों के किनारे बसी आबादी के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है। इसी गाद पर अब पंजाब की सियासत गरमाई हुई है। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने डैमों में जमी गाद पर भी चिंता जाहिर की थी लेकिन उससे बड़ी चिंता दरियाओं में जमी गाद की है। पंजाब में तीन बड़े दरियाओं रावी, ब्यास और सतलुज का विस्तृत नेटवर्क है। इन्हीं की सहायक नहरों और रजवाहों का जाल पूरे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक फैला हुआ है।
यदि इन तीनों दरियाओं में गाद की स्थिति देखें तो कई साल से इनकी सफाई नहीं हो पाई है। यही वजह है कि गाद की वजह से दरियाओं का बेड ऊंचा हो चुका है। ऐसे में अत्यधिक बारिश व डैमों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में दरियाओं में जल्द उफान आ जाता है और इससे बांधों को नुकसान पहुंचता है। इस साल भी बाढ़ में यही स्थिति देखने को मिली है। इस उफान ने कई धुस्सी बांध तोड़ दिए तो कई पक्के किनारे भी दरक गए हैं।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री भगवंत मान जब फील्ड में बाढ़ प्रभावित लोगों से उनका दर्द साझा कर रहे थे तो बहुत से लोगों ने उनसे दरियाओं की गाद निकालने का आग्रह किया था। लोगों का कहना था कि यदि दरिया साफ होते तो बाढ़ की मार ज्यादा न होती। इन्हीं हालात के मद्देनजर पंजाब सरकार दरियाओं की गाद की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार कर जल्द केंद्र से बात करेगी।
दरियाओं से गाद निकालना कोई माइनिंग नहीं : मान
मुख्यमंत्री मान कहते हैं कि दरियाओं से गाद निकालने की हमें इजाजत नहीं है, ये काम केंद्र करता है। गाद निकालने को वे माइनिंग मानते हैं, यह माइनिंग नहीं है। दरियाओं से मिट्टी निकालने में क्या हर्ज है। दरिया अब मिट्टी से भर गए हैं। लोग कह रहे हैं अगर दरिया से मिट्टी निकल जाती तो यह हाल नहीं होता, इस बारे में हम केंद्र से बात करेंगे। बाढ़ और नदी के पानी के प्रबंधन में पंजाब सरकार की एक बड़ी समस्या है जिसकी केंद्र अनुमति नहीं देता। पंजाब में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र को इस पर संज्ञान लेना पड़ेगा कि किस तरह पंजाब में दरियाओं से गाद को निकाला जाए, अन्यथा अत्यधिक बारिश की स्थिति में बाढ़ का खतरा बरकरार रहेगा।