फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बोर्ड के निर्देश, आढ़ती करें तिरपाल की व्यवस्था, आढ़तियों का जवाब, हम 24 घंटे के लिए जिम्मेदार

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। किसानों के खाते में सीधे भुगतान और बारदाने की कमी के मुद्दे पर टकराए आढ़ती और सरकार एक बार फिर से तिरपाल को लेकर एक बार फिर आमने सामने हैं। बदलते मौसम को देखते हुए राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने सभी मंडी सचिवों को आदेश जारी किए हैं कि संबंधित आढ़तियों से तिरपाल की व्यवस्था कराएं। इधर, आढ़तियों ने भी साफ तौर पर कह दिया है कि आढ़ती केवल 24 घंटे के लिए फसल को बारिश से बचाने के लिए जिम्मेदार है, देरी से उठान पर संबंधित खरीद एजेंसी ही इसके लिए जवाबदेही होगी।
विज्ञापन

हर साल गेहूं के सीजन में बारिश के चलते किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। विभाग द्वारा दावा किया जाता है कि मंडियों में पूरी व्यवस्था है, लेकिन तिरपाल को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती, बारिश होने पर किसान की फसल में नमी आ जाती है और उसे या तो सस्ते दामों पर आढ़ती को बेचनी पड़ती है या फिर इसे सुखाने के लिए कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है। अमर उजाला ने 15 अप्रैल के अंक में मंडियों में बारदाना और तिरपाल नहीं होने को लेकर समाचार प्रकाशित किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक की ओर से प्रदेश की सभी मार्केट कमेटी सचिव और सहायक सचिव को निर्देश दिए कि खुले अनाज की बोरों में भर्ती की जाए। साथ ही आढ़तियों के माध्यम से तिरपाल की व्यवस्था जरूर करा लें, ताकि गेहूं की फसल को बारिश से बचाया जा सके। बोरियों को स्टैग के रूप में लगवाएं। कच्चे में पड़े गेहूं को पक्के फड़ पर लगाएं और जल्दी से जल्दी उठान की व्यवस्था कराएं। नियमों के अनुसार, कमेटी द्वारा जब आढ़ती का लाइसेंस जारी किया जाता है तो वह तिरपाल होने का दावा करता है, इसके बाद ही उसका लाइसेंस रिन्यू किया जाता है। हालांकि, बारिश के समय आढ़ती तिरपाल नहीं लगाते हैं और इससे किसान को नुकसान झेलना पड़ता है।
देरी से उठान पर एजेंसी होगी जिम्मेदार : चौधरी
हरियाणा अनाज मंडी के राज्य प्रधान रजनीश चौधरी का कहना है कि आढ़ती 24 घंटे तक गेहूं के लिए जिम्मेदार है, लेकिन फसल कई दिन से पड़ी है। ऐसे में खरीद एजेंसी भी तिरपाल की व्यवस्था करे, अकेले आढ़ती पर ये जिम्मेदारी न डाले। क्योंकि उठान समय पर नहीं हो रहा है और आढ़ती के पास इतनी मात्रा में तिरपाल नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें