संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। फलों को केमिकल से पकाया जा रहा है। अगर इस विषय पर समय रहते गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाला समय बहुत ही भयावह होगा और देश के लोग कैंसर और गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाएंगे। यह चिंता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सेवाराम ने शुक्रवार को पत्रकारवार्ता में व्यक्त किए हैं। उन्होंने सबसे ज्यादा चिंताजनक केमिकल से फलों को पकाया जाना बताया। मध्य प्रदेश में बागवानी विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके सेवाराम ने बताया कि हर राेज लोग मंडियों से फल खरीदकर घर लाते हैं, ताकि उनको खाने से परिवार की सेहत अच्छी रहे। मगर यही फल अगर केमिकल से पकाए गए हों तो बेहतर सेहत की जगह गंभीर बीमारी दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस केमिकल का प्रयोग सबसे ज्यादा केला, पपीता और आम को पकाने में किया जाता है।
पके फलों को लंबी दूरी तक ले जाना संभव नहीं
सेवाराम ने कहा कि जब फल पेड़ों पर पक जाते हैं तो लंबी दूरी तक उनकाे ले जाना संभव नहीं होता है। वे खराब हो जाते हैं। इसलिए उनको कच्चा ही वहां से लाया जाता है। यहां पहुंचने के बाद कैल्शियम कार्बाइड का प्रयोग कर उनको पका दिया जाता है। मुनाफे के चक्कर में लोग दूसरों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इससे पकाए गए फल खाने से कैंसर होने का खतरा रहता है। लीवर और गुर्दा खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। शरीर में एलर्जी होने के साथ ही फलों में पाए जाने वाले प्राकृतिक पौष्टिक तत्व कम हो जाते हैं। ऐसे फल खाने से पेट दर्द, उल्टी-दस्त भी हो सकता है। इस मौके पर आरडब्ल्यूए सेक्टर-28 के प्रधान मोहिंदर सिंह बल्हारा, सेक्टर-26 के प्रधान धर्म सिंह हीरा, अनिल सूद, गोकल चंद, कैप्टन केएल सैनी और आरआर पॉल मौजूद रहे।
पपीते में नहीं मिलते बीज
सेवाराम ने कहा कि जब पपीता कुदरती तरीके से पकता है तो उनमें बीज भी बनते हैं। मगर उसे कच्चा ही तोड़ लिया जाए तो बीज नहीं बन पाते हैं। आजकल मंडियों में मिलने वाले पपीतों में बीज ही नहीं मिलते। इसका एक ही कारण है कि वे केमिकल की मदद से पकाया गया है। सेवाराम ने बताया कि उनकी उम्र 72 साल हो गई है। अब वे कोई आंदोलन नहीं कर सकते। मगर आने वाली पीढि़यों की चिंता सता रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक ईमेल उन्होंने पंचकूला उपायुक्त को भी भेजी थी। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी इस बारे में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।