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बिना साइट के बैठ रहे वेंडर, दुकानदारों ने जताई आपत्ति

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चंडीगढ़। हरियाणा और पंजाब के आधार कार्ड धारक वेंडरों को लेकर शहर में असमंजस की बनी हुई है। बाजार के दुकानदार कह रहे हैं कि साइट आवंटित हुए बिना ही वेंडर यहां बैठ रहे हैं, वहीं वेंडरों का कहना है कि जब हम निगम को फीस दे रहे हैं तो क्यों न बैठें। वेंडरों का आरोप है कि एक ओर निगम फीस लेता है और दूसरी ओर अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता सामान उठा लेता है।
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नगर निगम ने जनवरी माह से हरियाणा और पंजाब के आधार कार्ड धारक वेंडरों को वेंडिंग साइट देने के लिए पंजीकरण शुरू किया था। इसके लिए अब तक 1527 वेंडरों को पंजीकृत भी कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) की बैठक न होने तक ड्रॉ नहीं निकाला जा सकता है। ड्रॉ न निकलने से वेंडरों को साइट आवंटित नहीं हो पा रही है। इधर, वेंडर लगातार अपनी लाइसेंस फीस जमा कर रहे हैं। नियमानुसार बिना साइट वाले वेंडर अपनी फड़ी नहीं लगा सकते हैं। वेंडरों का कहना है टीवीसी न होने का खामियाजा हम क्यों भुगतें।
ज्ञात हो कि नगर निगम ने पिछले साल वेंडरों को वेंडिंग जोन में स्थानांतरित किया था। इस दौरान नगर निगम ने शहर के ऐसे वेंडरों को साइट आवंटित कीं, जिनके पास चंडीगढ़ का आधार कार्ड था। उसके बाद पंजाब और हरियाणा के वेंडरों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सर्वे उनका भी हुआ था और वह भी यहां वर्षों से कमा खा रहे हैं। अब केवल चंडीगढ़ के वेंडरों को साइटें दी जा रही हैं। उस दौरान अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उन्हें भी जल्द साइटें आवंटित की जाएंगी।
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लगभग एक साल से नहीं हुए टीवीसी
कोरोना महामारी के बाद से टीवीसी की बैठक नहीं हुई है। इससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। चंडीगढ़ में अब तक 9361 वेंडरों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से 4200 के पास साइट हैं। चीफ आर्किटेक्ट की ओर से 5500 साइट आवंटित की गई थीं, लेकिन कोरोना के कारण काफी सारे वेंडरों ने साइटें सरेंडर कर दी हैं। वहीं कई लोग निष्क्रिय हैं जो अपनी लाइसेंस फीस नहीं भर रहे हैं। ऐसे वेंडरों की लाइसेंस रद्द करने की तैयारी है।
हाल ही में मलोया और सेक्टर-26 मंडी में भी बैठाए वेंडर
हाल ही में नगर निगम ने ड्रॉ के माध्यम से मलोया स्थित पुनर्वास कॉलोनी में 40 और सेक्टर-26 मंडी में 22 वेंडरों को साइटें आवंटित की हैं। हालांकि सेक्टर-26 मंडी में मार्केट कमेटी की साइटें हैं, लेकिन मार्केट कमेटी ने निगम से मदद मांगी। उसके बाद निगम ने ड्रॉ निकालकर साइटें आवंटित कर दीं। सेक्टर-26 मंडी में प्रशासन की ओर से मार्केट कमेटी को 96 साइटें दी गई थीं, क्योंकि वहां 96 वेंडर पहले से ही बैठ रहे थे।
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