चंडीगढ़। निर्मल मिल्खा सिंह के निधन के बाद परिवार की ओर से आए शोक संदेश में कहा गया है कि वे पूरे परिवार की नींव थीं। मिल्खा सिंह का पूरा ख्याल रखती थीं। मिल्खा सिंह को कब क्या खाना है? उनके लिए क्या बनाना है? कब किसके घर जाना है? सब कुछ निर्मल मिल्खा सिंह तय करती थीं। मिल्खा सिंह अपनी पत्नी को प्यार से निम्मी कहकर बुलाते थे। दोनों एक साथ अपने जानकारों की शादियों से लेकर अन्य त्योहारों पर साथ-साथ ही दिखाई देते थे। यहां तक की चुनाव में भी वोट डालने एक साथ जाते थे।
मिल्खा सिंह भी अपनी पत्नी की एक-एक बात मानते थे। उनके नजदीकी मित्र बताते हैं कि यदि निर्मल मिल्खा सिंह ने मिल्खा सिंह को कह दिया कि घर पर पांच बजे तक पहुंच जाना है तो वे तय समय से पहले ही पहुंच जाया करते थे। जब निर्मल सिंह को मिल्खा सिंह के कोरोना पॉजिटिव होने की बात पता चली तो वे रो पड़ी थीं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें सरदार जी की चिंता हो रही है।
शहर के खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अहम योगदान
निर्मल मिल्खा सिंह जब भारतीय वॉलीबाल टीम की कप्तान थीं तो उन्हें शार्ट या स्कर्ट की बजाय सलवार कमीज पहनने के लिए जाना जाता था। वह चंडीगढ़ के खेल विभाग डॉयरेक्टर स्पोर्ट्स भी रहीं। उन्होंने खेल विभाग के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में अहम रोल रहा था। शहर में एक हॉकी स्टेडियम बनाने की इनका बड़ा सपना था। इसको लेकर इन्होंने अपनी निगरानी में सेक्टर 42 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को तैयार करवाया, जहां पर शहर का पहला हॉकी स्टेडियम का निर्माण हुआ। इसके बाद यहां पर महिलाओं का इंटरनेशनल लेवल का हॉकी टूर्नामेंट भी हुआ। इनकी देखरेख में सुखना लेक पर इंटरनेशनल लेवल का रोइंग कंपीटीशन भी कराया गया।
गोल्फ कोर्स के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने पहुंच जाती थीं
मिल्खा परिवार को शुरू से ही गोल्फ से लगाव रहा है। निर्मल मिल्खा सिंह का भी गोल्फ से काफी लगाव रहा। वे अक्सर अपने परिवार के साथ गोल्फ कोर्स पर गोल्फ खिलाड़ियों को उत्साह बढ़ाने पहुंच जाया करती थीं। साल 2013 में उनके घुटनों का ऑपरेशन हुआ था। इसके बावजूद भी वह गोल्फ कोर्स पर जाती थीं। बेट जीव मिल्खा सिंह के नाम से यहां पर खेले जाने वाले गोल्फ टूर्नामेंट के आखिरी दिन तक वह खिलाड़ियों में जोश भरने के लिए उपस्थित रहती थीं।