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31 मार्च तक बढ़ा लॉयंस का कार्यकाल, नए टेंडर में देरी पर प्रशासक कराएंगे जांच

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चंडीगढ़। दक्षिण के सेक्टरों में सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया में देरी का मामला शुक्रवार को सदन की बैठक में गरमा गया। मामले में हुई बहस के बाद टेंडर प्रक्रिया की फाइल सदन में मंगवाई गई, तो 9 अगस्त के बाद कोई कार्रवाई ही नहीं हुई थी, जबकि मई माह की सदन की बैठक में ही नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया था। इस पर सदन ने कहा कि फिलहाल 31 मार्च तक लायंस कंपनी का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए, लेकिन इस मामले में हुई देरी के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित से जांच कराने की मांग की जाएगी। साथ ही दोषी व्यक्ति पर रिकवरी के साथ कार्रवाई तय की जाएगी।
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बता दें कि नवंबर माह में लायंस कंपनी का मैनुअल और फरवरी 2022 में मैकेनिकल ठेका खत्म हो रहा है। निगम दक्षिण सेक्टरों में सफाई के लिए लायंस कंपनी को हर माह लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये देता है। शुक्रवार को सदन में लायंस कंपनी का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव आते ही सीनियर डिप्टी मेयर महेश इंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि मैंने निगम से इनके संबंध में प्रश्न पूछे थे, जिनके जवाब बिल्कुल उलट हैं। इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका जवाब दिया जाए।
पार्षद शक्तिप्रकाश देवशाली ने कहा कि आज कार्यकाल बढ़ाने का मतलब है भविष्य में फिर से मनमानी करने की छूट देना, इसलिए इस मामले में कार्रवाई तय होनी चाहिए। भाजपा पार्षद अरुण सूद ने कहा कि मामले की फाइल मंगवाई जाए ताकि पता चले कि इस प्रक्रिया में हुआ क्या। इस पर एमओएच डॉ. एपी सिंह ने फाइल लाकर सदन के सामने रखी। इसमें निगम की ओर से जुलाई तक पूरी प्रक्रिया कर ली गई थी लेकिन 9 अगस्त के बाद इस मामले में न कोई बैठक हुई और न टेंडर लगाया गया। इस पर पार्षद भड़क गए। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ ने कहा कि इसमें एक व्यक्ति दोषी नहीं है। इस पर मेयर ने कहा कि विपक्ष हंगामा करने की बजाय गलत का साथ देने में लगा है।
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बनना था दक्षिण के सेक्टरों का टेंडर, पूरे शहर का बना डाला आरएफपी
मामले में एक और गफलत सामने आई। मई माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि सेक्टर-31 से 60 तक के लिए सफाई व्यवस्था का नए सिरे से टेंडर होगा। भविष्य में इसी तर्ज पर सेक्टर 1 से 30 तक के सेक्टरों की सफाई व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों ने 13 जुलाई को इस प्रक्रिया के लिए कमेटी बनाई। 15 जुलाई को पहली बैठक हुई। 20 जुलाई को मुख्य सफाई निरीक्षण चंद्रमोहन ने अपनी रिपोर्ट दे दी। इस पूरी रिपोर्ट में एमओएच ने सेक्टर 1 से 60 तक के लिए सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में देने की रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) बना दिया। इस संबंध में 9 अगस्त के बाद कोई बैठक नहीं हुई, जबकि इंजीनियरिंग विभाग ने पूरे शहर के क्षेत्र के जानकारी कमेटी को उपलब्ध होने की जानकारी दे दी थी। इस पर एमओएच ने कहा कि सीनियर डिप्टी मेयर के कहने पर यह प्रस्ताव बना था। पार्षदों ने कहा कि बिना सदन में एजेंडा लाए किसी के हने पर प्रस्ताव कैसे बन सकता है।
जनवरी में होगा नया टेंडर, दो जोन में बंटेगा शहर
सदन में फैसला लिया गया कि आचार संहिता के दौरान नया टेंडर लगाना संभव नहीं है, इसलिए दो माह में टेंडर की कागजी प्रक्रिया को पूरा करेंगे। उसके बाद जनवरी में नए सिरे से टेंडर करेंगे। उस समय तय कर लिया जाएगा कि शहर को दो जोन में बांटकर सफाई व्यवस्था को कैसे निजी हाथों में दिया जा सकता है। दोनों जोन के ठेकेदार भी अलग होंगे।
अपनी प्रस्तुति में दिए थे पार्षदों के प्रशस्ति पत्र
बता दें कि लायंस कंपनी ने काम की समयसीमा बढ़ाने के लिए पार्षद, आरडब्ल्यूए व कुछ संगठनों की ओर से दिए गए प्रशस्ति पत्रों को तत्कालीन आयुक्त के सामने प्रस्तुत किया था। निगम की ओर से गठित कमेटी ने स्पष्ट कहा था कि सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से टेंडर किया जाना चाहिए। उसके बाद पार्षदों ने आरोप लगाया था कि हमने कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र दिया था न कि कंपनी को।
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