पिंजौर/बरवाला। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान किसानों और जवानों के बीच टकराव के बाद केंद्र की सख्ती का असर चंडी मंदिर और नग्गल टोल प्लाजा पर किसानों के धरने में भी देखने को मिला। वीरवार को दोनों जगह बहुत कम संख्या में किसान धरनास्थल पर पहुंचे। दूसरी तरफ पिंजौर और चंडी मंदिर थाना प्रभारी भी अपनी टीम के साथ टोल प्लॉजा पर पहुंचे थे। उन्होंने किसानों से धरना समाप्त करने की अपील की। किसानों ने पुलिस की अपील मानकर बिना विरोध के धरना समाप्त कर दिया।
इसी कारण करीब एक माह से चंडी मंदिर टोल प्लॉजा और नग्गल टोल प्लॉजा पर चला आ रहा धरना किसानों ने वीरवार को समाप्त कर दिया। वे धरनास्थल से टेंट, कुर्सियां और अन्य सामान उठाकर चलते बने। धरना समाप्त करने के बारे में किसान नेताओं का कहना था कि चंडी मंदिर टोल प्लॉजा पर लगातार धरना देने से दिल्ली आंदोलन पर पूरी तरह फोकस नहीं कर पर रहे थे। अब चंडी मंदिर और नग्गल टोल प्लाजा से धरना खत्म कर केवल दिल्ली धरने पर बैठे किसानों का सहयोग करेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई घटना के बाद आंदोलन कमजोर पड़ा है। इसका नतीजा है कि किसानों ने टोल प्लॉजा से भी अपना धरना खत्म कर लिया है।
पांच करोड़ की लगी चपत
वीरवार को किसानों का धरना टोल प्लॉजा से खत्म होते ही टोल प्लॉजा प्रबंधन ने वाहनों से टोल वसूलना शुरू कर दिया। टोल प्लॉजा प्रबंधन का दावा है कि करीब एक माह टोल प्लॉजा बंद रहने से कम से कम टोल प्लॉजा प्रबंधन को 4 से 5 करोड़ रुपये तक नुकसान हुआ है। दोपहर बाद टोल प्लॉजा से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाने लगा।
भाकियू ब्लॉक प्रधान का दावा, प्रशासन से नहीं चाहते टकराव
भारतीय किसान यूनियन ब्लॉक प्रधान कर्म सिंह ने बताया कि सरकार के सख्त आदेश थे कि टोल प्लॉजा पर धरना खत्म किया जाए। वे नहीं चाहते थे कि उनका प्रशासन से किसी भी प्रकार का टकराव हो इसलिए सरकार कोई कार्रवाई करती उससे पहले प्रशासन की अपील स्वीकार कर शांतिपूर्वक ढंग से टोल प्लॉजा से अपना धरना समाप्त कर दिया है। इसके अलावा वे चाहते थे कि उनका ध्यान न बंटे और उनका ध्यान केवल केवल दिल्ली आंदोलन तक केंद्रित रहे उसके लिए उन्होंने टोल प्लॉजा से अपना धरना समाप्त कर दिया।
‘देश का विरोध कोई सहन नहीं कर सकता’
बरवाला। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा और लालकिले पर तिरंगे के अपमान के बाद किसान किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। वीरवार सुबह करीब 9 बजे ही किसान यूनियन के नेता और किसान नग्गल टोल प्लाजा पर इकट्ठे हुए और बैठक कर धरना समाप्त करने का निर्णय लेकर धरना समाप्त कर दिया। किसानों का यह धरना 25 दिसंबर को शुरू हुआ था जो 27 दिन लगातार जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र सिंह ने कहा कि दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान जिन लोगों ने तिरंगे का अपमान किया है वे उसकी निंदा करते हैं। कुछ शरारती तत्वाें ने किसान आंदोलन में घुसकर इसे खराब करने का काम किया है। सरकार का विरोध व देश का विरोध इसमें बहुत बड़ा फर्क है क्योंकि लोकतंत्र में सरकारों का अपनी मांगों को लेकर विरोध करना देशवासियों का अधिकार है लेकिन राष्ट्र का विरोध कोई भी नागरिक सहन नहीं कर सकता। धरना समाप्त होते ही टोल कर्मचारियों की ओर से टोल प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया।
मौके पर पहुंचकर किसानों से बात की तो किसानों ने भी टोल प्लाजा शुरू करने की हां कर दी। करीब एक महीने के बाद वीरवार से टोल प्लाजा शुरू हो गया है। एक महीने में टोल प्लाजा प्रबंधन को 4 से 5 करोड़ रुपये तक नुकसान हुआ है।
-गगन, जीएम, चंडी मंदिर टोल प्लाजा
टोल पर एक दिन में करीब 7 लाख रुपये की आमदन होती है। 28 दिन टोल बंद रहने से टोल कंपनी को नुकसान झेलना पड़ा है।
-मनमोहन चौहान, मैनेजर, नग्गल टोल प्लाजा
धरना समाप्त होने के बाद कर्मियों ने वाहनों से टोल वसूलना शुरू किया। - फोटो : PKL OFFICE