चंडीगढ़ में चालान की रकम में यूटी प्रशासन किसी तरह की कटौती करने के मूड में नहीं है। ऐसे में वाहन लेकर चलते समय अपने सभी कागजात पूरे रखने में ही फायदा है। अन्यथा भारी भरकम चालान भुगतना पड़ेगा। एडवाइजर मनोज परिदा ने भी संकेत दिए हैं कि चंडीगढ़ में चालान की दरों में किसी तरह की राहत फिलहाल नहीं दी जाएगी।
असल में कई राज्यों ने अपने यहां नागरिकों को चालान की रकम में कुछ राहत दी थी। ऐसी ही मांग चंडीगढ़ में भी उठ रही थी। लेकिन सोमवार को यूटी सचिवालय में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ हुई बैठक में साफ हो गया कि इसमें कोई कटौती नहीं होने जा रही है। हालांकि राज्य के अधीन आने वाले चालान की रकम तय करने के लिए प्रशासक ने अफसरों को निर्देश जरूर दिए हैं।
ट्रांसपोर्ट विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक नए मोटर व्हीकल एक्ट-2019 के सेक्शन 200 में लगभग 24 ऐसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन शामिल हैं, जिनमें जुर्माना राशि तय करने का अधिकार राज्यों को है। कई वाहन चालक अपने चालान को कोर्ट में चुनौती नहीं देते, वह मौके पर या फिर ट्रैफिक लाइन में जाकर जुर्माने की राशि अदा करते हैं। गौरतलब है कि गुजरात सरकार की ओर से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 24 मामलों में जुर्माने की दर 90 फीसदी तक कम कर दी गई है। इसके अलावा ऐसे कई अन्य राज्य भी फाइन घटाने पर विचार कर रहे हैं।
सांसद खेर ने भी कहा था, नहीं कम होनी चाहिए चालान की रकम
13 सितंबर को सेक्टर-10 स्थित होटल माउंट व्यू में हुई एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में ट्रैफिक चालान की भारी भरकम राशि का मुद्दा गरमाया था। चालान की राशि कम करने की बात पर सांसद किरण खेर ने दो टूक जवाब दिया कि वह केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ हैं, चालान कटने ही चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों के चालान कटेंगे तभी नियमों की सही से पालना करेंगे। चालान की रकम में कटौती नहीं होनी चाहिए।
क्या कहते हैं अफसर
यूटी सचिवालय में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ बैठक हुई। इसमें कुछ ट्रैफिक चालान की रकम के बारे में चर्चा हुई है। हमसे राज्य के अधीन आने वाले अधिकारों के बारे में जानकारी मांगी है। जल्द ही इसकी जानकारी मुहैया करा देंगे। रकम घटने या बढ़ने पर अंतिम फैसला यूटी प्रशासन ही लेगा।
- अजय कुमार सिंगला, ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी