पंचकूला। सीबीएसई ने शहर के सार्थक स्कूल को तय मानक से ज्यादा एडमिशन देने पर नोटिस जारी किया है। स्कूल में 3000 छात्रों पर महज 75 टीचर हैं, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात 1:40 हो गया है, जो बोर्ड के 1:30 के मानक से ज्यादा है। नोटिस के बाद प्रबंधन ने शिक्षा विभाग से 20 और टीचर मांगे हैं, अब स्कूल की ट्रांसफर ड्राइव पर नजर टिकी है।
सार्थक स्कूल इन दिनों दोहरी मुसीबत में फंसा है। एक तरफ शिक्षा विभाग की ट्रांसफर ड्राइव पर शिक्षकों के मिलने की उम्मीद टिकी है, तो दूसरी तरफ सीबीएसई ने क्षमता से अधिक बच्चों के दाखिले पर स्कूल पर स्ट्रेंथ कम करने की तलवार लटका दी है। स्कूल में सीनियर कक्षाओं के 40 से ज्यादा और जूनियर कक्षाओं के 22 से ज्यादा सेक्शन हैं। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल प्रबंधन को क्लास मैनेजमेंट में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
20 शिक्षकों की डिमांड, सीएम और शिक्षा मंत्री तक लगाई गुहार
स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को 20 नए अध्यापकों की डिमांड भेजी है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार हर साल बढ़ती बच्चों की स्ट्रेंथ के कारण शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखे जा चुके हैं। प्रिंसिपल रेनू बाला ने कहा कि शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर ड्राइव शुरू कर दी है और स्कूल प्रबंधन को आश्वासन दिया गया है कि इस ड्राइव में सार्थक स्कूल को प्राथमिकता के आधार पर नए अध्यापक मिलेंगे। स्कूल को उम्मीद है कि इस ट्रांसफर ड्राइव से 10 शिक्षक सीनियर क्लासेज और 10 प्राइमरी क्लासेज को मिल जाएंगे। इस तरह शिक्षकों की कमी कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद है।
सीबीएसई ने जारी किया नोटिस, 2 साल बाद 50 हजार लगेगा जुर्माना
दूसरी तरफ सीबीएसई ने स्कूल में क्षमता से अधिक बच्चों के दाखिले को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अगर स्कूल ने अपनी स्ट्रेंथ पर लगाम नहीं लगाई तो दो साल बाद 50 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। सीबीएसई के नियमों के अनुसार एक सेक्शन में तय संख्या से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, लेकिन स्कूल में इस नियम का उल्लंघन हो रहा है। बोर्ड की इस चेतावनी के बाद स्कूल प्रबंधन की चिंता और बढ़ गई है।
10 नए कमरों की मंजूरी, समग्र शिक्षा की टीम कर चुकी है दौर
स्कूल में बढ़ती स्ट्रेंथ को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग से 10 नए कमरे बनाने की डिमांड की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। प्रिंसिपल अनुराधा ने बताया कि समग्र शिक्षा परियोजना के तहत तकनीकी टीम स्कूल का दौरा कर कमरों की डिमार्केशन कर चुकी है। जल्द ही इन कमरों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे बच्चों के बैठने की समस्या कुछ हद तक कम होगी। लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब स्कूल को पर्याप्त संख्या में शिक्षक मिलेंगे। फिलहाल स्कूल प्रबंधन की निगाहें शिक्षा विभाग की ट्रांसफर ड्राइव पर टिकी हैं।