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‘अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों को जल्द निपटाया जाए ’

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पंचकूला। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने जिला सचिवालय के सभागार में जिला स्तरीय सर्तकता एवं निगरानी कमेटी की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला पंचकूला में दर्ज केसों की समीक्षा की।
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इस बैठक में विनय प्रताप सिंह ने पुलिस विभाग द्वारा ऐसे मामलों के लिए नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी को निर्देश दिए कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिले में दर्ज हुए मामलों की जांच में तेजी लाएं, जिससे पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाकर आर्थिक सहायता दी जा सके। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि पुलिस जांच लंबित न रहे और एक तय समय में मामलों की जांच की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इस अधिनियम के अंतर्गत गैर अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा पीड़ित अनुसूचित जाति के व्यक्तियों पर होने वाले अत्याचारों जैसे भूमि का अनधिकृत कब्जा, कत्ल, डकैती, दुष्कर्म, आगजनी आदि से पीड़ित व्यक्तियों को 85 हजार से 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
उपायुक्त ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय सर्तकता निगरानी कमेटी के मनोनीत गैर-सरकारी सदस्यों की भी सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को निगरानी समिति के गैर-सरकारी सदस्यों की एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति संबंधित पुलिस थाने में इस अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद पीड़ित पक्ष से मुलाकात करेगी और उसे उक्त अधिनियम के तहत कानूनी अधिकार व राज्य सरकार की योजना के अंतर्गत दी जा रही वित्तीय सहायता के बारे में बताएगी। पीड़ित को कानूनी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से इस कमेटी में लीगल वालंटियर को भी शामिल किया जाएगा। यह कमेटी पीड़ित पक्ष से बातचीत के दौरान सामने आए अन्य तथ्यों को रिपोर्ट के माध्यम से संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष भी प्रस्तुत कर सकती है।
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