चंडीगढ़। शिवालिक साइट प्लानर लिमिटेड (एसएसपीएल) के मोहाली में मौजूद प्रोजेक्ट कासा एस्पाना से जुड़े अधिकार बिना तय प्रक्रिया व बिना औपचारिकताएं पूरी किए एटीएस इंफ्रा बिल्ड लिमिटेड को देने के मामले में स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग करते हुए जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
चंडीगढ़ निवासी विपुल सूद ने एडवोकेट सौरव भाटिया के माध्यम से जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि उसने वर्ष 2012 में शिवालिक साइट प्लानर नामक कंपनी से एक दुकान खरीदी थी। लोक अदालत ने इस दुकान को याची के नाम करने का आदेश दिया था। आदेश के पालन से जुड़ा केस लोक अदालत में अभी लंबित है। यह प्रोजेक्ट मोहाली के बड़ माजरा में 2012 में शुरू हुआ था और कंपनी ने सभी ग्राहकों से करार किए थे, लेकिन न तो आज तक प्रोजेक्ट पूरा हुआ और न ही लोगों को कब्जा मिला।
अब शिवालिक साइट प्लानर नामक कंपनी ने एटीएस नामक कंपनी को प्रोजेक्ट हैंडओवर कर रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस भी ट्रांसफर करवा दिए हैं जो असांविधानिक व गैर कानूनी है। कोर्ट को बताया गया कि गमाडा या रेरा किसी भी कंपनी के कामकाज, प्रोजेक्ट व अन्य दस्तावेजों की जांच किए बिना रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते और न ही प्रमोटर या डवेलपर का लाइसेंस दे सकते हैं।
इस मामले में सभी नियमों की अनदेखी कर मिलीभगत से एटीएस को रजिस्ट्रेशन नंबर व लाइसेंस दे दिए गए, वह भी तब जब शिवालिक साइट प्लानर नामक कंपनी गमाडा में डिफॉल्टर है और जिसके निदेशकों पर केस चल रहे हैं। आज तक कंपनी का कोई भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा और निदेशक अमरदीप सिंह हीरा भगोड़ा करार दिया जा चुका है। निचली अदालत उक्त प्रोजेक्ट को अटैच कर नीलामी के आदेश भी जारी कर चुकी है जिसपर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है।
याची ने कहा कि हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट की ऑक्शन पर स्टे किया है, लेकिन 17 जनवरी, 2020 को जारी वारंट स्टे नहीं किया है इसलिए एटीएस को दिए गया रजिस्ट्रेशन व अन्य लाइसेंस व प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप पर रोक लगाईजाए। इसके साथ ही इस मामले में अधिकारियों से मिलीभगत की दलील देते हुए सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच का आदेश दिया जाए।