पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिन से घमासान मचा हुआ है। इस मामले में पार्टी हाईकमान की तरफ से कोई कदम उठाया जाता, उससे पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थक खेमे ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज कर दी हैं। नाराज विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ विजिलेंस जांच और मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ मी-टू के मामले में कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस के दिग्गजों ने यह भी फैसला किया है कि नाराज विधायकों और मंत्रियों को उकसाने वाला कोई कदम न उठाया जाए और पार्टी हाईकमान द्वारा लिए जाने वाले फैसले का इंतजार किया जाए। प्रदेश कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ ने भी कहा है कि पार्टी के किसी नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई या जांच नहीं की जा रही।
कैप्टन खेमे की तरफ से यह फैसला नाराज विधायकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भी लिया गया है। बेअदबी और कोटकपूरा फायरिंग मामलों में कथित तौर पर दोषी बादल परिवार को सजा दिलाने की मांग को लेकर पंजाब कांग्रेस के विधायक, मंत्री और सांसद लामबंद हो गए थे। अब कैप्टन सरकार द्वारा नाराज विधायकों के खिलाफ पुराने केसों की जांच शुरू करने और विधायक परगट सिंह को कैप्टन के सलाहकार द्वारा धमकाने की घटना के बाद से वे निरंतर मुखर हो रहे हैं। उनके समर्थन में कई अन्य विधायक भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के कामकाज पर उंगली उठाने लगे हैं।
पता चला है कि पंजाब कांग्रेस ने हाईकमान द्वारा कदम उठाए जाने से पहले नाराज विधायकों को अलग-थलग करके उनकी मांग को कानून-व्यवस्था और अदालती अड़चनों से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि कैप्टन की कार्यप्रणाली पर लगाए जा रहे सवालिया निशानों को हाईकमान के सामने नाराज विधायकों की रंजिशन कार्रवाई करार दिया जा सके।
पता चला है कि विजिलेंस ब्यूरो ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी के खिलाफ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और स्थानीय निकाय विभाग में प्रमोशन व नियुक्तियों को लेकर बरती गई अनियमितताओं के लिए जितनी तेजी के छापे मारने शुरू किए थे, उस कार्रवाई को ओर आगे बढ़ाने से गुरेज किया जा रहा है।
चरणजीत चन्नी को लेकर राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन ने जो कड़ा रुख अपनाया था, उसमें भी नरमी आ गई है। आयोग की चेयरपर्सन ने सरकार के जवाब का इंतजार करने का फैसला किया है, जबकि सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार इस मामले को ठीक वैसे ही जवाब के साथ समाप्त करने जा रही है, जैसा जवाब मुख्यमंत्री ने घटना के समय दिया था। इस मामले में पीड़ित महिला अधिकारी की तरफ से कोई लिखित शिकायत न तो सरकार को और न ही महिला आयोग को दी गई है। वहीं, चन्नी भी उक्त महिला अधिकारी से माफी मांग चुके हैं। अब अहम मुद्दा परगट सिंह को धमकी का है, जिसे लेकर जल्द ही कैप्टन खुद परगट सिंह के बातचीत कर सकते हैं।