शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों को लेकर एक योजना से काम कर रहे हैं। शिअद का अल्टीमेटम सिर्फ एक दिखावा है। दोनों की नजर किसानों के वोट बैंक पर है, लेकिन उनकी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।
पार्टी मुख्यालय में नेता प्रतिपक्ष और आप नेता हरपाल सिंह चीमा और विधायक अमन अरोड़ा ने संयुक्त बयान में कहा कि बादल परिवार ऐसे हथकंडे अपनाकर प्रदेश में अपनी खो चुकी सियासी जमीन को ढूंढ रहा है। जिसमें यह कभी भी कामयाब नहीं हो सकते, क्योंकि पंजाब के किसानों समेत हर वर्ग के लोग बादल परिवार की सभी चालों को जान चुके हैं। चीमा ने कहा कि बादल परिवार ने हमेशा प्रदेश के किसानों, दलितों और व्यापारियों के हितों की कुर्बानी देकर अपने निजी हितों को पहल दी है। अमन अरोड़ा ने कहा कि कैप्टन और सुखबीर सिंह बादल एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर नरेंद्र मोदी को बचा रहे हैं। दोनों पार्टियां चाहती हैं कि यह किसान विरोधी काले कानून पंजाब में लागू हों, क्योंकि कैप्टन-बादल-मोदी के तार कारपोरेट घरानों से जुड़े हैं। अरोड़ा ने कहा कि सुखबीर बादल आज कौन से मुंह के साथ पंजाब के किसान विरोधी कानूनों का विरोध कर रहे हैं। अकाली दल और बादल परिवार ने तो पूरी उम्र किसान हितैषी होने के दावों के साथ राजनीतिक रोटियां सेकी हैं।