अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के समर्थ मिशन के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन पटियाला में किया गया। इस मौके पर मिशन के निदेशक अनिल बवेजा ने ज़ोर देते हुए कहा कि भारत में भारी मात्रा में पराली हर साल जलाई जाती है। यदि इस अवशेष को उपयोग में लाकर पैलेट तैयार किए जाएं तो यह पराली जलाने और कोयले की कमी जैसी दोहरी समस्या का प्रभावी समाधान बन सकता है। उन्होंने कहा कि कोयले का बेहतरीन विकल्प बायोमास बन सकता है। उन्होंने नए उद्यमियों को इस लाभकारी क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस दिशा में कई योजनाएं संचालित कर रही है, जो किसानों और स्टार्टअप्स के लिए मददगार सिद्ध होंगी।
इस कार्यक्रम में मिशन अधिकारियों, 200 से अधिक किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), थर्मल पावर प्लांट अधिकारियों, बैंकरों, उद्यमियों और पैलेट निर्माताओं ने भाग लिया। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन एनपीटीआई के निदेशक डॉ. एम रविचंद्र बाबू ने किया। उन्होंने समर्थ मिशन के उद्देश्यों और बायोमास पैलेट निर्माण से होने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक सिद्ध होगी।
कृषि विभाग पंजाब के अधिकारी डॉ. एएस मान ने पटियाला जिले में कच्चे बायोमास की उपलब्धता की जानकारी दी और किसानों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक संजय कुमार सिंह और सहायक निदेशक सौरभ महाजन ने विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया।