संवाद न्यूज एजेंसी पंचकूला। प्रदेश में लगातार गिर रहे भूजल स्तर को सुधारने के लिए अब गांवों में भूजल सहेलियों की नियुक्ति की जा रही है। ये पानी बचाने और उसके उपयोग के तरीकों में बदलाव करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करेंगी। इसके लिए प्रदेश के 14 जिलों के 1656 गांवों में भूजल सहेलियां नियुक्त की जाएंगी। प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जिनके काफी हिस्से डार्क जोन में आ चुके हैं। वहां का भूजल स्तर खराब से चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। वहां सुधार के लिए केंद्र सरकार ने दिसंबर 2019 में अटल भूजल योजना शुरू की थी। मगर बीच में कोरोना संक्रमण आने के कारण योजना पर ज्यादा काम नहीं हो सका। इस योजना के तहत जिले के उन गांवों में बैठक और जल पंचायतों का आयोजन कर लोगों को पानी बचाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना था। अब इसी योजना में भूजल सहेलियों को भी जोड़ा जा रहा है।
निशुल्क करेंगी काम
इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में उसी गांव की बहू या बेटी को जोड़ा जाएगा। इसके लिए उसे कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस पद के लिए उसी का चयन किया जाएगा जो युवा हो और भागदौड़ करने में सक्षम हो। गांव में जिसकी अच्छी पकड़ हो और लोगों की अपनी बात समझाने में सक्षम भी हो।
इन जिलों को किया गया है योजना में शामिल
इस योजना में अब तक चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, पानीपत, करनाल, कैैथल, पलवल और कुरुक्षेत्र को शामिल किया गया है। इन जिलों की 1656 ग्राम पंचायतों में भूजल सहेली योजना को सफल बनाने के लिए एसई प्रमोद जैन को इसका नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पानी उपयोग के तरीके बदलने सिखाएंगी
ये भूजल सहेली लोगों को पानी बचाने के तरीके सिखाएंगी। जैसे आरओ से निकले पानी वो वाटर कूलर में या पौधों की सिंचाई में प्रयोग करने के बारे में बताएंगी। बारिश के पानी को एकत्र करने और उसे जमीन में रिसाइकिल करने के तरीकों से अवगत कराएंगी। गांवों में खुले रहने वाले नलों को बंद करने के लिए जागरूक करेंगी। इसी तरह वे सभी तकनीक लोगों को बताएंगी जो पानी को बचाने में सहायक हों।
अटल भूजल योजना से जुड़े 14 जिलों के 1656 गांवों में भूजल सहेलियों की मदद ली जाएगी। काफी ग्राम पंचायतों में इनको नामित कर दिया गया है, जबकि बाकी में यह प्रक्रिया अभी जारी है। इस योजना पर प्रभावी रूप से काम किया जा रहा है ताकि आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके। - प्रमोद जैन, नोडल अधिकारी, अटल भूजल योजना